Shalarth ID Scam: वर्धा-नागपुर-यवतमाल कनेक्शन, शिक्षा अधिकारियों की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

Yavatmal Education Scam: यवतमाल शिक्षा विभाग में शालार्थ आईडी घोटाले के बाद हड़कंप। SIT और शिक्षा आयुक्त की संभावित रेड के डर से पुरानी फाइलों की जांच शुरू। जानें पूरा मामला।
High alert in Yavatmal Education Dept over Shalarth ID scam. SIT probe & Education Commissioner's visit looms. 14 years of appointments under scanner.
शालार्थ आईडी घोटाला (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Shalarth ID Fraud: शिक्षा क्षेत्र को झकझोर देने वाले शालार्थ आईडी घोटाले में यवतमाल के दो-दो शिक्षा अधिकारी फंस चुके हैं। इसके चलते इस प्रकरण की गहन जांच के लिए एसआईटी कभी भी यवतमाल पहुंच सकती है। जिले में रोज़ाना ‘एसआईटी आ गई’ जैसी चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, एसआईटी से पहले ही शिक्षा आयुक्त की किसी भी समय अचानक (सरप्राइज) विज़िट होने की आशंका भी अब जताई जा रही है।

इस आशंका का कारण यह है कि वर्तमान शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह कुछ वर्ष पूर्व यवतमाल के जिलाधिकारी रह चुके हैं। उस दौरान भी उन्होंने शिक्षा विभाग की कई अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया था। अब वे राज्य के शिक्षा आयुक्त हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने मराठवाड़ा के एक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में बोगस शालार्थ आईडी घोटाले के संबंध में अचानक दौरा कर पुरानी फाइलों की जांच की थी।

शालार्थ आईडी घोटाले में गिरफ्तारी

इस कार्रवाई से अन्य जिलों के शिक्षा अधिकारी कार्यालय भी अलर्ट हो गए हैं। यवतमाल जिले में प्रतिबंध अवधि के दौरान भी कई शिक्षकों की नियुक्तियां होने के आरोप हैं। विशेष रूप से, तत्कालीन शिक्षा अधिकारी चिंतामण वंजारी को नागपुर में कार्यरत रहते हुए शालार्थ आईडी घोटाले में सबसे पहले गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्धा-नागपुर होते हुए यवतमाल आए शिक्षा अधिकारी रविंद्र काटोलकर को दिसंबर में पुलिस ने गिरफ्तार किया। इन दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की नजर अब पूरे अमरावती संभाग पर केंद्रित हो गई है।

शिक्षा विभाग में 2012 से अब तक की फाइलों की खोजबीन

यवतमाल के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी रविंद्र काटोलकर को शालार्थ आईडी घोटाले में दिसंबर में गिरफ्तार किया गया था। वे 48 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहने के कारण नियमानुसार जिला परिषद ने उनका प्रभार योजना शिक्षा अधिकारी किशोर पागोरे को सौंप दिया है। वर्तमान में पागोरे ही माध्यमिक शिक्षा अधिकारी का कार्यभार संभाल रहे हैं।

एसआईटी के यवतमाल आने को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि फिलहाल एसआईटी अब तक नहीं आई है। सभी जिलों को वर्ष 2012 से अब तक की नियुक्तियों की फाइलें सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। उसी अनुसार जिले में भी फाइलों को व्यवस्थित किया जा रहा है।

चार शिक्षा संस्थाओं के खिलाफ शिकायतें

इस बीच जिले की चार शिक्षा संस्थाओं के खिलाफ चार अलग-अलग शिकायतें शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई हैं। अमरावती के शिक्षा उपसंचालक द्वारा 20 जनवरी को संबंधित संस्था संचालकों और शिकायतकर्ताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। हालांकि, यह सुनवाई अचानक रद्द कर दी गई। अब यह सुनवाई कब होगी, इस पर शिकायतकर्ताओं की नजर टिकी हुई है।

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