यवतमाल में सूखे का जायजा लेने 10 अक्टूबर को आएगा केंद्रीय दल, 4 गांवों में होगा फसल निरीक्षण

Central Team Visit Yavatmal: यवतमाल में सूखे की स्थिति का जायजा लेने केंद्रीय अंतर-मंत्रालयीन दल 10 अक्टूबर को दौरा करेगा। टीम नेर तहसील के चार गांवों में फसलों का निरीक्षण करेगी।
yavatmal drought assessment central team ground inspection
यवतमाल केंद्रीय दल दौरा(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Yavatmal Drought Assessment: यवतमाल जिले में बारिश में आए बड़े अंतराल, खरीफ फसलों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव और लगातार गिरती भूजल स्तर की पृष्ठभूमि में यवतमाल की सूखा स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय मंत्रालय का दल 10 अक्टूबर को जिले में पहुंचेगा। केंद्रीय अंतर-मंत्रालयीन दल (आईएमसीटी) जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष दौरा कर फसल स्थिति का निरीक्षण करेगा। इस दौरान दल पानी की उपलब्धता, भूजल स्तर तथा किसानों पर सूखे के प्रभाव की जानकारी भी लेगा।

इससे पहले 9 अक्टूबर को वाशिम में अमरावती संभाग के पांचों जिलों की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। केंद्रीय दल के विदर्भ दौरे में यवतमाल और वाशिम का समावेश है। अमरावती विभाग के कृषि सहसंचालक को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्रीय दल का दौरा 8 से 11 अक्टूबर के बीच होगा। 9 अक्टूबर को वाशिम जिलाधिकारी कार्यालय में सुबह 10 से 11 बजे तक संभागीय समीक्षा बैठक होगी। इसके बाद दल रात में यवतमाल पहुंचेगा।

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नेर तहसील के चार गांवों में निरीक्षण

10 अक्टूबर को सुबह 10 से 11 बजे तक यवतमाल जिलाधिकारी कार्यालय में केंद्रीय दल के समक्ष जिले की सूखा स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद दल नेर तहसील के लिए रवाना होगा, नेर तहसील के लोणी, मांडवगड, वटफली और दोडकी गांवों में केंद्रीय दल प्रत्यक्ष रूप से फसल स्थिति का निरीक्षण करेगा। इस दौरान किसानों और अधिकारियों से संवाद कर सूखे की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली जाएगी।

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भूजल स्तर में 1.11 मीटर की गिरावट

सूखे की गंभीरता का एक और संकेत भूजल स्तर के आंकड़ों से सामने आया है। सितंबर 2026 में जिले की सभी 16 तहसीलों में पांच वर्ष के औसत की तुलना में भूजल स्तर में औसतन 1.11 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है। महागांव तहसील में यह गिरावट सबसे अधिक 2.47 मीटर रही।

सभी 16 तहसीलों में सूखे की स्थिति गंभीर

बारिश में आए अंतराल के कारण जिले की सभी 16 तहसीलों में सूखे के मानदंड लागू होने की स्थिति बनी है। दारव्हा, दिग्रस, घाटंजी, केलापुर, महागांव, मारेगांव, पुसद, उमरखेड, वणी, झरी जामणी, यवतमाल, बाभुलगांव, कलंब, आर्णी, नेर और रालेगांव तहसीलों में बारिश की कमी तथा फसलों पर पड़े प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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