child marriage prevente (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal News: नए वर्ष की शुरुआत में ही जिले में चार नाबालिग बालिकाओं के प्रस्तावित बाल विवाहों को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और जिला बाल संरक्षण कक्ष की मदद से रोका गया। इन मामलों में यवतमाल तहसील के वाघाड़ी, नेर तहसील के रत्नापुर बेडा, बाभूलगांव तहसील के गणोरी तथा महागांव तहसील के पिंपलगांव इजारा गांव शामिल हैं। जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 के दौरान चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर बाल विवाह से संबंधित 60 से अधिक कॉल प्राप्त हुए थे।
सूचना मिलते ही टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संबंधित परिवारों का समुपदेशन किया। कानून के अनुसार विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होना अनिवार्य है। नाबालिग बालिका के विवाह की सूचना मिलने पर अभिभावकों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई तथा इसके दुष्परिणाम समझाए गए।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी विशाल जाधव ने कहा कि बाल विवाह कानूनन दंडनीय अपराध है और यह बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे बच्चों की आयु पूर्ण होने के बाद ही विवाह करें, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाल विवाह की जानकारी मिलने पर 24 घंटे सक्रिय 1098 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने की अपील की गई है। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराने, प्रोत्साहित करने या समारोह संपन्न कराने वाले व्यक्ति को दो वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों दंड का प्रावधान है। कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर ग्रामसेवक को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी तथा आंगनवाड़ी सेविका को सचिव नियुक्त किया गया है।
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यह कार्रवाई जिला बाल संरक्षण कक्ष के विधि एवं परिवीक्षा अधिकारी महेश हल्दे, चाइल्ड हेल्पलाइन सुपरवाइजर मनीष शेलके, पूनम कनाके, गणेश आत्राम, केस वर्कर पूजा शेलारे, अश्विनी नासरे, शुभम कोंडलवार तथा स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संपन्न हुई।
यह अभियान जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी विशाल जाधव, जिला बाल संरक्षण अधिकारी देवेंद्र राजूरकर और चाइल्ड हेल्पलाइन परियोजना समन्वयक फाल्गुन पालकर के मार्गदर्शन में चलाया गया।