भोयर गांव की पहल (सौजन्य-नवभारत)
Yavatmal: इस समय जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। ऐसी ठंडी रातों में जब हर कोई गर्म कंबल की तलाश में होता है, तब कुछ गरीब बच्चे खुले आसमान के नीचे, एक छोटे से दीये की रोशनी में हर रात पढ़ाई करते नजर आते हैं। भोयर नामक गांव में चल रही यह अनोखी “बालनगरी” नाम की स्कूल इन दिनों सभी का ध्यान आकर्षित कर रही है।
भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को देशभर में बाल दिवस मनाया जा रहा है। इसी मौके पर इन मेहनती बच्चों और उनकी “बालनगरी” की प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। भोयर ग्राम पंचायत कार्यालय के बाहर, खुले मैदान में हर शाम एक अलग ही स्कूल सजता है।
गानों, कहानियों, हंसी और सीखने के आनंद से भरपूर यह है ‘बालनगरी’ यह सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक जीवंत केंद्र है। यहां बच्चों को सिर्फ स्कूल का पाठ्यक्रम नहीं सिखाया जाता, बल्कि जीवन के लिए जरूरी कौशल, खेल, कला, संवाद और समूह में काम करने की क्षमता जैसे मूल्य भी सिखाए जाते हैं। गांव के अधिकांश बच्चे आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। माता-पिता मजदूरी, खेती या ईंटभट्ठों पर काम करते हैं।
ऐसे में ओवी फाउंडेशन ने इन बच्चों के लिए “बालनगरी” नामक शिक्षण केंद्र शुरू किया है। दिनभर सरकारी स्कूल में पढ़ने के बाद बच्चे शाम 5:30 से 8 बजे तक यहां आते हैं। रोज़ लगभग 70 से 80 बच्चे उपस्थित रहते हैं। गानों, कहानियों, पुस्तकों, गणित और भाषा के खेलों तथा समूह गतिविधियों के ज़रिए उन्हें शिक्षा दी जाती है।
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फाउंडेशन की कार्यकर्ता समीक्षा चव्हाण और महेश कदम बच्चों को बेहद प्यार और मित्रवत वातावरण में पढ़ाते हैं। इससे बच्चों को सीखने में डर नहीं लगता, बल्कि आत्मविश्वास, सोचने की क्षमता और सीखने की रुचि बढ़ती है। बिजली न होने या बैठने की उचित जगह न होने पर भी ये बच्चे पूरे उत्साह से आते हैं, क्योंकि यहां की शिक्षण पद्धति बालकेंद्रित और अनुभवाधारित है।
यह अनोखी शिक्षण पहल प्रणाली जाधव ने शुरू की थी। गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और कलंब तहसील के धनगरवाड़ी गांव में वंचित बच्चों के लिए “बालनगरी” की शुरुआत की। वहां आज कई गरीब बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इस सफलता के बाद उन्होंने अब भोयर गांव में दूसरी “बालनगरी” शुरू की है, जहां बच्चे फिर से पूरे उत्साह और आनंद के साथ सीख रहे हैं।