टिपेश्वर वाइल्डलाइफ सेंचुरी (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Tipeshwar Tiger Reserve: यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बाघों के दीदार का रोमांचक अनुभव लेना चाहते हैं, तो यवतमाल जिले का टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य आपके लिए बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। हाल के वर्षों में यहां बाघों की संख्या में वृद्धि और बेहतर पर्यटन सुविधाओं के चलते पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा लाभ राजस्व के रूप में भी देखने को मिल रहा है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, टिपेश्वर अभयारण्य से प्रतिमाह लगभग सात लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां बाघों के साथ-साथ तेंदुआ, भालू, नीलगाय, चीतल, सांभर और विविध पक्षी प्रजातियों का भी दीदार कर रहे हैं।
लगभग 148 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में वर्तमान में 18 से 20 बाघ होने का अनुमान है। इनमें चार छोटे बाघ शावक है। पर्याप्त जंगल क्षेत्र, जलस्रोत और शिकार की उपलब्धता के कारण यहां बाघों का संरक्षण बेहतर ढंग से हो पा रहा है। यही वजह है कि बाघ दर्शन की संभावना यहां काफी अधिक मानी जाती है।
पर्यटकों की सुविधा के लिए अभयारण्य में सुन्ना और कोदोरी नामक दो प्रमुख गेट विकसित किए गए हैं। दोनों ही गेट से जंगल सफारी की व्यवस्था की गई है। इन गेटों पर कुल 25 जिप्सियां तैनात की गई हैं, जिससे पर्यटक सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से जंगल भ्रमण कर सकें।
विशेष रूप से पीलखान क्षेत्र के समीप और माथनी परिसर में बाघों की आवाजाही अधिक देखी जाती है। इसी कारण इन क्षेत्रों में पर्यटकों को बाघ दर्शन के अवसर ज्यादा मिल रहे हैं। सुबह और शाम की सफारी के दौरान यहां रोमांचक दृश्य देखने को मिलते हैं।
टिपेश्वर अभयारण्य में बढ़ते पर्यटन से स्थानीय युवाओं को गाइड, चालक और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार भी मिल रहा है। इससे आसपास के गांवों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है। कुल मिलाकर टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य आज न केवल बाघ संरक्षण का सफल उदाहरण बन रहा है, बल्कि पर्यटन और राजस्व के क्षेत्र में भी यवतमाल जिले की पहचान को नई ऊंचाई दे रहा है। अगर रोमांच, प्रकृति और बाघ दर्शन का अनूठा अनुभव चाहिए, तो टिपेश्वर जरूर आइए।
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वन विभाग द्वारा ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, पर्यटकों के लिए प्रतीक्षालय, पानी और प्राथमिक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। इसके कारण पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। सप्ताहांत और छुट्टियों के दिनों में दोनों गेटों पर भारी भीड़ देखी जाती है।
अभयारण्य क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा के लिए कैमरा ट्रैप, नियमित गश्त और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। वन्यजीव संरक्षण के प्रति स्थानीय नागरिकों में भी जागरूकता बढ़ी है, जिससे शिकार और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगा है।