यवतमाल आरक्षण अपडेट: SC के फैसले की आड़ में उपवर्गीकरण का विरोध, कृति समिति ने बुलाई पत्रकार परिषद
Yavatmal SC Reservation: यवतमाल में आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी समिति ने राज्य सरकार के प्रस्तावित कदमों का विरोध करते हुए इसे अनुसूचित जातियों के अधिकारों पर असर डालने वाला बताया।
- Written By: अंकिता पटेल
यवतमाल, अनुसूचित जाति, आरक्षण, उपवर्गीकरण, विरोध, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Yavatmal SC Reservation Social Justice: यवतमाल अनुसूचित जातियों के आरक्षण में उपवर्गीकरण के मुद्दे को लेकर आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी कृति समिति ने यवतमाल में पत्रकार परिषद आयोजित कर राज्य सरकार की भूमिका पर कड़ा विरोध जताया। समिति के प्रमुख पदाधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की आड़ में राज्य स्तर पर उपवर्गीकरण लागू करने के प्रयासों को अनुसूचित जातियों के अधिकारों पर आघात बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की।
महाराष्ट्र की सामाजिक परिस्थितियां अलग
पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए एडवोकेट जयसिंग चव्हाण ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय पंजाब राज्य की विशिष्ट परिस्थितियों से संबंधित है, जबकि महाराष्ट्र की स्थिति अलग है।
उन्होंने कहा कि राज्य की 59 अनुसूचित जातियों में जिन समुदायों ने सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन के साथ-साथ अस्पृश्यता का दंश झेला है, उन्हें संविधान के तहत आरक्षण का अधिकार प्राप्त है। पत्रकार परिषद में उमेश मेश्राम, प्रदीप बोरकर, प्रा. अंकुश वाकडे, अमर तांडेकर, मीनाक्षी सावलकर, चंदन हातागड़े, वीर तथा धम्मा कोटंबे सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
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उपवर्गीकरण का अधिकार केवल केन्द्र के पास
चव्हाण ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जातियों के आरक्षण में उपवर्गीकरण का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। उन्होंने कहा कि महार-बौद्ध, मातंग, चांभार और वाल्मीकि समाज को आरक्षण का अधिक लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है, जबकि शेष 55 जातियों की और से उपवर्गीकरण की कोई ठोस मांग सामने नहीं आई है।
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कृति समिति की और से जिलेभर में जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा की गई। साथ ही 20 जून को नागपुर स्थित धम्मभूमि पर आयोजित मोर्चे में यवतमाल जिले से लगभग पांच हजार कार्यकर्ता और नागरिक वाहनों के काफिले के साथ शामिल होंगे।
