ग्रामीण रास्तों को भी मिलेंगे नंबर, पगडंडी सड़कों पर अतिक्रमण की होगी जांच, प्रशासन की पहल
Yavatmal News: यवतमाल में राज्य राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों को एक नंबर दिया जाएगा। यह कोड नंबर देने से पहले ज़िला और तहसील समितियों का गठन किया जाएगा।
- Written By: प्रिया जैस
यवतमाल न्यूज
Yavatmal News: यवतमाल जिले में राज्य राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों को एक विशिष्ट नंबर दिया जाता है। यह संबंधित राजमार्गों पर विभिन्न स्थानों पर बोर्ड पर भी लिखा होता है। अब गांवों और बस्तियों की छोटी सड़कों को भी इसी तरह के नंबर दिए जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे नंबर देते समय सबसे पहले रास्तों पर और पगडंडी मार्ग पर किया गया अतिक्रमण हटाया जाएगा।
महाराष्ट्र की साढ़े तीन सौ तहसीलों की पूरी अर्थव्यवस्था इन ग्रामीण सड़कों पर निर्भर करती है। गांव की अर्थव्यवस्था एक गांव को दूसरे गांव से जोड़ने वाली सड़कों, गांव में पगडंडियों, वाहनों के लिए सड़कों और खेतों तक जाने वाली पगडंडी सड़कों से ही चलती है। कई गांवों में गांव के रास्तों को लेकर बड़े पैमाने पर विवाद हैं। कुछ जगहों पर सड़कें नक्शे पर दिखाई नहीं देतीं, जबकि कुछ जगहों पर लोगों ने इन सड़कों पर अतिक्रमण कर लिया है।
सड़कों को कोड नंबर देने का फैसला
पगडंडी की सड़कें किसानों के विवादों और अदालती मुकदमों का सबसे बड़ा कारण बन गई हैं। अब इस समस्या के समाधान के लिए राज्य के राजस्व विभाग ने गांव की सड़कों के साथ-साथ पगडंडी की सड़कों को भी कोड नंबर देने का फैसला किया है। यह कोड नंबर देने से पहले ज़िला और तहसील समितियों का गठन किया जाएगा।
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ये समितियां गांव की सड़कों और पगडंडी सड़कों पर अतिक्रमण हटाने के लिए ग्रामीणों की बैठकें करेंगी। इन समितियों में ज़िला कलेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, भू-अभिलेख अधीक्षक, निवासी उप-कलेक्टर, उप-विभागीय अधिकारी, तहसीलदार, गट विकास अधिकारी, पुलिस निरीक्षक आदि शामिल होंगे।
ऐसे पता चलेगा सड़कों का उद्गम स्थल
गांव की सड़कों और पगडंडी सड़कों को नंबर देने के लिए, उन सड़कों का पता लगाना होगा जिन पर अतिक्रमण किया गया था। महाराष्ट्र में मूल बंदोबस्त और सर्वेक्षण का काम 1890 और 1930 के बीच हुआ था। मूल भूमि सर्वेक्षण के दौरान गाँवों की माप करके उनके नक्शे तैयार किए गए थे। नक्शे में गांवों को दर्शाया गया है।
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इन सड़कों की ज़मीन किसी भी सर्वेक्षण संख्या में शामिल नहीं है। इसलिए, मानचित्र पर सड़कों की चौड़ाई दर्शाई गई है। महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966 की धारा 20 के प्रावधानों के अनुसार ये सड़कें सरकार के स्वामित्व में हैं। इन सड़कों की पहचान करके उन्हें अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
ऐसे होंगे सड़क नंबर
राजस्व विभाग ने गांवों और पगडंडी सड़कों को कोड देने का तरीका तय किया है। इसके अनुसार सड़कों के कोड नंबर में पहले ज़िले का दो अंकों का कोड, फिर तहसील का दो अंकों का कोड, फिर गांव का तीन अंकों का कोड, फिर सड़क के प्रकार के अनुसार अंग्रेजी अक्षर A, B, C, D या E लिखे जाएँगे। इस प्रकार की सड़क मानचित्र पर दर्शाई गई है।
