अंकुरित ज्वार का चारा बना जानलेवा, यवतमाल में 22 मवेशियों की मौत, 78 की बचाई गई जान
Cattle Poisoning: पांढरकवड़ा के पहापल गोरक्षण संस्थान में लांग ज्वार का कोमल चारा खाने से 100 मवेशी बीमार हो गए। जिसमें से 22 मवेशियों की मौत हो गई, जबकि 78 को बचा लिया गया है।
- Written By: केतकी मोडक
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
100 Cattles Sufferes Food Poisoning In Yavatmal: यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा तहसील के पहापल स्थित गोरक्षण संस्थान में सोमवार को एक बेहद हृदयविदारक और गंभीर घटना सामने आई है। यहां लांग ज्वार के कोमल फुटवे खाने से करीब 100 मवेशियों को अचानक गंभीर फूड पॉइजनिंग हो गई। इस भयानक हादसे में देखते ही देखते 22 मवेशियों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। हालांकि, घटना की जानकारी मिलते ही पशुपालन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई की, जिसके चलते आपातकालीन उपचार से 78 मवेशियों की जान समय रहते बचा ली गई है।
चारा खाते ही बिगड़ने लगी स्थिति, संस्थान में मचा हड़कंप
प्राप्त प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, पहापल के गोरक्षण संस्थान में आश्रित मवेशियों को नियमित खान-पान के तहत लांग ज्वार के कोमल फुटवे चारे के रूप में परोसे गए थे। इस हरे और कोमल चारे को खाने के कुछ ही समय बाद मवेशियों के शरीर में विषबाधा के तीव्र लक्षण दिखाई देने लगे। मवेशी बेसुध होकर जमीन पर गिरने लगे और उनके मुंह से झाग आने लगा। संस्थान परिसर में स्थिति को अचानक बेहद गंभीर होते देख प्रबंधन द्वारा तत्काल पशुसंवर्धन (पशुपालन) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस त्रासदी की सूचना दी गई।
डॉ. अनुप कालमेघ के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा
हादसे की भयावहता को देखते हुए पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनुप कालमेघ के कुशल नेतृत्व में डॉक्टरों और सहायकों का एक विशेष उपचार दल सभी आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं के साथ तुरंत मौके पर पहुंचा। इस आपातकालीन चिकित्सा दल में व्यंकटेश सर्कलवार तथा पशुधन पर्यवेक्षक हरिभाऊ येडमे ने बेहद महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई। इसके साथ ही, स्थानीय सेवादाता स्वप्नील तोटावर, प्रणित राठोड और ओमप्रकाश बुटेकर ने भी दवाओं की आपूर्ति और रात भर चले राहत एवं उपचार कार्य में डॉक्टरों का पूरा सहयोग किया।
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पशु चिकित्सकों ने बिना एक पल गंवाए सभी बीमार मवेशियों को एंटीडोट और ड्रिप चढ़ाना शुरू किया, जिसके चलते गंभीर रूप से बीमार हो चुके 78 मवेशियों को मौत के मुंह से बाहर निकालने में अभूतपूर्व सफलता मिली। हालांकि, डॉक्टरों का दल पहुंचने और उपचार शुरू होने से पहले ही विष का असर ज्यादा होने के कारण 22 मवेशी दम तोड़ चुके थे।
हरे और कोमल चारे को लेकर डॉक्टरों ने जारी की विशेष चेतावनी
इस दर्दनाक घटना के बाद से संपूर्ण पांढरकवड़ा क्षेत्र के पशुपालकों और किसानों में भारी चिंता और डर का माहौल बना हुआ है। इस पृष्ठभूमि में मुख्य पशु चिकित्सकों ने सभी पशुपालकों को अपनी दुधारू और अन्य मवेशियों को सीधे खेतों से लाया गया अत्यधिक हरा और कोमल चारा खिलाने से पहले आवश्यक सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, ज्वार के शुरुआती और बेहद कोमल फुटवों में कुछ खास मौसमों में ‘हाइड्रोस्यानिक एसिड’ नामक विषैला तत्व स्वतः पैदा हो जाता है, जो पशुओं के लिए जानलेवा साबित होता है। पशुपालन विभाग ने भी सभी नागरिकों से अपील की है कि वे चारे की गुणवत्ता, उसके भंडारण और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क रहें। इस बड़े हादसे ने एक बार फिर जिले में पशुओं के चारे की नियमित वैज्ञानिक जांच और आधुनिक पशुपालन प्रणाली की आवश्यकता को पूरी तरह से रेखांकित कर दिया है।
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