

Chandrapur Thermal Power Station Bringing Water Crisis In City: राज्य में सर्वाधिक बिजली उत्पादन करने वाले स्थानीय सुपर ताप बिजलीघर को इरई बांध के तेजी से घटते जलस्तर ने चिंता में डाल दिया है। भारतीय मौसम विभाग ने इस बार अल नीनो के प्रभाव से औसत से कम बारिश का अनुमान देकर इस बिजलीघर प्रबंधन की धड़कनें और तेज कर दी है। मौसम विभाग का यह अनुमान सटीक निकला तो इस बिजलीघर को अगले वर्ष भारी जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है, जिससे बिजलीघर का बिजली उत्पादन प्रभावित होने खतरा उत्पन्न हो सकता है।
इरई बांध के पानी पर ही चंद्रपुर ताप बिजलीघर में बिजली उत्पादन निर्भर है। बिजलीघर के समीप स्थित यह बांध ही इस बिजलीघर का मुख्य पानी का स्त्रोत है। साथ ही इस बांध से ही चंद्रपुर के शहरवासियों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। कुल 1620 मीटर लंबाई तथा 30 मीटर की ऊंचाई वाले इस बांध की जलसंग्रहण क्षमता 0.985 घन किलोमीटर है। शहर को होती है जलापूर्ति यह भी उल्लेखनीय है कि, इरई बांध से ही चंद्रपुर शहर की करीब 5 लाख की जनसंख्या को जलापूर्ति होती है।
यह जलापूर्ति बरकरार रखने को चंद्रपुर मनपा की ओर से बांध से प्रतिमाह एक मिलियन क्यूबिक मीटर पानी लिफ्ट किया जाता है। जबकि बिजलीघर बांध से प्रतिमाह 7.5 मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक पानी बिजली उत्पादन के लिए लिफ्ट करता है। दोनों को मिलाकर बांध से प्रतिमाह 10 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी निकाला जाता है।
इस बांध में जब जलसंग्रहण 207.500 मीटर तक पहुंचता है तब इस बांध को लबालब माना जाता है, इसके बाद जलस्तर बढ़ने के बाद बांध के गेट खोलने पड़ते है। इस साल जिले में तापमान 47 डिग्री से अधिक पहुंचा था, अप्रैल माह से मई माह के अंत तक जिले में तापमान औसतन 45 डिग्री रहा था, इससे हुए बाष्पिभवन और परकोलेशन से इस बांध का जलस्तर तेजी से घट गया है।
इस बांध में प्रतिदिन 0.25 मीटर से जलस्तर में गिरावट देखने मिल रही है। 1 जून को इस बांध में पानी का लेवल 204.600 मीटर था। प्रत्येक चार दिनों बाद बांध में पानी का यह लेवल एक मीटर से कम हो रहा है। पानी का लेवल घटने की यही गति बरकरार रही तो एक माह के भीतर ही इस बांध का जलस्तर 200 मीटर से नीचे पहुंचना तय है। जो आनेवाले दिनों के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकता है।
भारतीय मौसम विभाग ने इस बार देश में अल नीनो की स्थिति बनने से औसत से कम बारिश का अनुमान जताया है। यह अनुमान सही निकला तो अगले वर्ष ग्रीष्मकाल में सीटीपीएस में बिजली उत्पादन तथा शहर की जलापूर्ति व्यवस्था संकट में घिरने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि इस बांध में पिछले वर्ष 1 जून तक उपयुक्त जलसंग्रह 65.518 मिलियन क्यूबिक मीटर था, इस वर्ष बांध में सिर्फ 63.098 मिलियन क्यूबिक मीटर अर्थात 40 प्रतिशत पानी बचा हुआ है। एक माह बाद यही स्थिति 34 प्रतिशत से कम पर पहुंच सकती है।
गौरतलब है कि औसत से कम वर्षा के कारण इराई बांध में अपर्याप्त पानी के चलते इस बिजलीघर को वर्ष 2017 में अपने कुछ यूनिट बंद करने पड़े थे। तब इस बांध में पानी का लेवल 198 मीटर तक नीचे आ गया था और जिले में सिर्फ 53 प्रतिशत बारिश हुई थी।
नवभारत लाइव के लिए चंद्रपुर से संजय तायड़े की रिपोर्ट