भद्रावती के लेंडाला तालाब के सौंदर्यीकरण के दौरान हुई हजारों मछलियों की मौत, मछुआरों की आजीविका पर संकट
Mass Fish Deaths At Lendala Lake: सौंदर्यीकरण कार्य के लिए लेंडाला तालाब का जलस्तर घटाए जाने से ऑक्सीजन की कमी हो गई, जिसके कारण हजारों मछलियों की मौत हो गई और मछुआरों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
- Written By: केतकी मोडक
लेंडाला तालाब (सोर्स - नवभारत)
Thousands of Fishes Dies During Beautification of Lendala Lake in Bhadravati: चंद्रपुर जिले के भद्रावती शहर की सुंदरता बढ़ाने वाले और अनेक स्थानीय मछुआरा परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार रहे ऐतिहासिक लेंडाला तालाब में इन दिनों एक बेहद चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो गई है। तालाब के सौंदर्यीकरण एवं गहरीकरण कार्य को गति देने के लिए अचानक जलस्तर काफी कम कर दिया गया है। पानी कम होने के कारण तालाब में ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है, जिससे तड़प-तड़प कर हजारों मछलियां मर रही हैं। इस अचानक आई आपदा के कारण क्षेत्र के पारंपरिक मत्स्य व्यवसाय पर एक गंभीर आर्थिक संकट मंडराने लगा है।
विधायक करण देवतले के प्रयासों से शुरू हुआ है प्रोजेक्ट
गौरतलब है कि स्थानीय विधायक करण देवतले के विशेष और निरंतर प्रयासों से लेंडाला तालाब के सर्वांगीण सौंदर्यीकरण के लिए सरकार द्वारा बड़ी निधि उपलब्ध कराई गई है, जिसके बाद यहां जमीनी स्तर पर कार्य शुरू किया जा चुका है। इस दूरगामी परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को भविष्य में एक स्वच्छ, सुंदर और प्राकृतिक पर्यटन स्थल उपलब्ध कराना है।
हालांकि, इस शानदार विकास कार्य के दौरान स्थानीय प्राकृतिक मत्स्य संपदा को हो रहे भारी नुकसान और सैकड़ों गरीब मछुआरों की दैनिक आजीविका पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को लेकर अब पूरे जिले में गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है।
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१० से १५ लाख रुपये की मत्स्य संपदा का भारी नुकसान
समीक्षा और प्रत्यक्ष निरीक्षण के दौरान तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों के मृत शरीर पानी के ऊपर तैरते हुए पाए गए हैं। स्थानीय मत्स्य विशेषज्ञों और संस्था का दावा है कि पानी को अचानक सुखाए जाने और लापरवाही बरतने से लगभग 10 से 15 लाख रुपये की मूल्यवान मत्स्य संपदा पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। इस विनाशकारी घटना के कारण स्थानीय सहकारी संस्था को इस सीजन में होने वाली अपेक्षित आय अब बिल्कुल नहीं मिल पाएगी, जिससे संस्था को कम से कम 5 लाख रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान उठाना तय माना जा रहा है।
मच्छिंद्र मछुआ सहकारी संस्था ने की मुआवजे की मांग
इस पूरे संकट पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए ‘मच्छिंद्र मछुआ सहकारी संस्था, भद्रावती के अध्यक्ष दिलीप माढरे ने कहा कि, “भद्रावती शहर का सौंदर्यीकरण निश्चित रूप से एक स्वागतयोग्य कदम है और हम विकास के विरोधी नहीं हैं। लेकिन प्रशासन को यह समझना होगा कि विकास कार्यों के साथ-साथ यहां की अनमोल मत्स्य संपदा और गरीब मछुआरों के हितों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
बिना किसी पूर्व तैयारी के पानी कम किए जाने से हजारों मछलियों की असमय मौत हो गई है, जिससे संस्था को भारी वित्तीय घाटा हुआ है और सैकड़ों परिवारों के चूल्हे बुझने की कगार पर आ गए हैं।” उन्होंने जिला प्रशासन और शासन से प्रभावितों को तुरंत उचित सहायता और आर्थिक मुआवजा प्रदान करने की पुरजोर मांग की है।
नागरिकों की मांग
लेंडाला तालाब में हुए इस हादसे के बाद अब स्थानीय जागरूक नागरिकों और मछुआरों ने संयुक्त रूप से प्रशासन के समक्ष अपनी कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं:
- वैज्ञानिक पुनर्वास: तालाब के पानी को सुखाने से पहले वहां मौजूद जीवित मत्स्य संपदा को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से किसी अन्य जलाशय में स्थानांतरित (पुनर्वास) किया जाना चाहिए था।
- आर्थिक पंचनामा: राजस्व और मत्स्य विभाग के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचकर मृत मछलियों से हुए नुकसान का आधिकारिक पंचनामा तैयार करें, ताकि प्रभावितों को तत्काल आर्थिक सहायता मिल सके।
- भविष्य का ब्लूप्रिंट: भविष्य में जब भी ऐसे बड़े विकास कार्य या गहरीकरण के प्रोजेक्ट हाथ में लिए जाएं, तो मत्स्य व्यवसाय को सुरक्षित रखने के लिए पहले से ही एक योजनाबद्ध ब्लूप्रिंट तैयार किया जाए।
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स्थानीय नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि लेंडाला तालाब के आधुनिक सौंदर्यीकरण से भद्रावती शहर को निश्चित रूप से पूरे राज्य में एक नई पहचान मिल सकती है, लेकिन इस चमक-दमक के बदले सैकड़ों मूल निवासी परिवारों की आजीविका को संकट में डालना किसी भी कल्याणकारी व्यवस्था के लिए न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। विकास और स्थानीय पर्यावरण के बीच एक सटीक संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है।
