यवतमाल नगर परिषद चुनाव के 6 महीने बाद भी विकास कार्य ठप, नगराध्यक्ष और पार्षदों पर उठ रहे सवाल
Yavatmal Election News: यवतमाल नगर परिषद में जनप्रतिनिधियों के आने के बाद भी विकास कार्यों पर ब्रेक लगा हुआ है। नगराध्यक्ष प्रियदर्शनी उईके के आश्वासनों के विपरीत शहर में गड्ढे और गंदगी का अंबार है।
- Written By: केतकी मोडक
यवतमाल नगर परिषद (सोर्स- सोशल मीडिया)
Yavatmal Municipal Council Election Review: यवतमाल नगर परिषद के चुनाव के बाद शहर के विकास को गति मिलने, प्रत्येक वार्ड में लंबित विकास कार्य पूरे होने और जनप्रतिनिधियों द्वारा नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान किए जाने की उम्मीद जताई गई थी। लेकिन चुनाव के लगभग छह महीने बाद भी विकास कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं आने से नगराध्यक्ष और पार्षदों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रशासकीय कार्यकाल में मिली थी काम को गति
नगर परिषद में जब प्रशासनिक व्यवस्था लागू थी, तब तत्कालीन प्रभारी मुख्याधिकारी माधुरी मडावी, दादाराव डोलहारकर, विजय सरनाईक तथा बाद में शुभम क्यातमवार के कार्यकाल में कई विकास कार्यों को गति मिली थी। सीमित अधिकार होने के बावजूद विभिन्न परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया। इसी कारण अब नगर परिषद के कुछ कर्मचारियों और नागरिकों के बीच यह चर्चा है कि जनप्रतिनिधियों की तुलना में प्रशासनिक कार्यकाल अधिक प्रभावी साबित हुआ था।
नगराध्यक्ष प्रियदर्शनी उईके ने चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और पूर्व विधायक मदन येरावार के माध्यम से नगर परिषद को धनराशि की कमी नहीं होने देने का आश्वासन दिया था। हालांकि, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर नगर परिषद की ओर से निधि की कमी का हवाला देते हुए सड़क और नाली निर्माण कार्यों में देरी होने की बात कही गई।
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वर्तमान में यवतमाल शहर के अधिकांश वार्डों में सड़क, नाली, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य लंबित पड़े हैं। वहीं मुख्य सड़कों पर आवारा पशुओं का बढ़ता विचरण दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। चर्चा यह भी है कि पार्षदों को अपने-अपने वार्डों के विकास के लिए पर्याप्त निधि उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिसके कारण कई छोटे लेकिन आवश्यक विकास कार्य ठप पड़े हैं।
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अटके कामों को लेकर लोगों में भारी असंतोष
दूसरी ओर करोड़ों रुपये की बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बावजूद नागरिकों के दैनिक जीवन से जुड़े छोटे और जरूरी कार्यों की अनदेखी किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। शहर की मुख्य सड़कों पर गड्ढों की भरमार, अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था और रुके हुए विकास कार्यों को लेकर नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
लोगों का कहना है कि सत्ता तो बदल गई, लेकिन शहर की स्थिति नहीं बदली। राज्य में सत्तारूढ़ दल की सरकार होने के बावजूद यवतमाल का विकास अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। ऐसे में नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि क्या शहर को अब भी केवल घोषणाएं ही मिलेंगी और विकास इंतजार करता रहेगा?
