निषेध: 3 गांवों ने किया बहिष्कार का निर्णय, आगामी जिप व पंस के चुनावों पर होगा असर
Maregaon Election Boycott : मारेगांव तालुका के नवरगांव, हिवरी और सगनापुर ने रुके सड़क कार्य से नाराज होकर चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया। 8 किमी सड़क की मरम्मत की मांग तेज हो गई है।
- Written By: आंचल लोखंडे
तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन 3 गांवों ने किया बहिष्कार का निर्णय (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Maregaon road protest: हिवरी और सगनापुर के ग्रामवासियों ने रुके हुए सड़क के काम को लेकर आने वाले चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इस बारे में तहसीलदार उत्तम नीलावाड को ज्ञापन सौंपा गया है। तालुका में करणवाड़ी फाटा को म्हैसदोडका, हिवरी, गोधनी से जोड़ने वाली यह 8 किमी की सड़क बहुत खराब हो गई है। इस वजह से इस सड़क पर सफर करने वाले लोगों को पिछले पंद्रह से बीस सालों से पैसे, शारीरिक और मानसिक नुकसान हो रहा है।
इसके लिए इस गांव के लोगों ने कई बार प्रशासन और लोगों के प्रतिनिधियों को शांति से गुहार लगाई है। उन्होंने कानूनी तरीकों से विरोध किया, धरने, अनशन वगैरह किए। लेकिन, इतने सालों बाद भी इस सड़क की मरम्मत का काम नहीं हुआ है। इससे निराश इन तीनों गांवों के लोग सड़क की मरम्मत का काम पुरा करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने तब तक चुनाव का बहिष्कार का फैसला किया है। तहसीलदार उत्तम नीलावाड को ज्ञापन देते समय तीनों गांवों के नागरिक मौजूद थे।
ये भी पढ़े: यवतमाल बैंक स्कैम: फरार आरोपी थाने में आने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं, पुलिस पर उठ रहे सवाल
सम्बंधित ख़बरें
4 साल लंबी लड़ाई सफल: यवतमाल उपभोक्ता आयोग का आदेश- 10 किसानों को 8% ब्याज के साथ मुआवजा दे बीमा कंपनी
यवतमाल में पहली बार ‘फार्मर ग्रुप लीग’, किसानों के लिए अनोखी प्रतियोगिता; विजेताओं को मिलेगा अध्ययन दौरा
चंद्रपुर: स्थानीय निकायों में 50% से अधिक आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई, कई नगरपालिकाओं पर संकट
आदिवासी नहीं वनवासी? बयान को लेकर यवतमाल में बवाल, बिरसा ब्रिगेड का विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
आगामी जिप व पंस के चुनावों पर होगा असर
कुछ दिन बाद जिला परिषद, पंचायत समिति चुनाव होने वाले हैं। तालुका के तीन गांव इनमें नवरगांव, हिवरी, सगनापुर ने इसका बहिष्कार का निर्णय किया है। इस आंदोलन को करणवाड़ी, अर्जुनी, गोधनी, म्हैसदोडका गांवों के नागरिकों ने समर्थन किया है। अगर इन सात बड़ी आबादी वाले गांवों के नागरिक एक ही समय में चुनाव का बहिष्कार करते हैं, तो इसका इस चुनाव पर बड़ा असर पड़ेगा जिससे प्रशासन की परेशानी बढ़ सकती है।
