यवतमाल जिले में ‘महा-रेशम अभियान 2026’ शुरू, नई शहतूत खेती के लिए पंजीकरण, 4.32 लाख रुपये तक अनुदान
Maha Resham Abhiyan 2026: यवतमाल में महा-रेशम अभियान 2026 के तहत नई शहतूत खेती के लिए पंजीकरण शुरू हुआ है, जिसमें किसानों को मनरेगा, सिल्क समग्र और पोकरा योजनाओं से 4.32 लाख रुपये तक अनुदान मिलेगा।
- Written By: आंचल लोखंडे
mulberry farming subsidy (सोर्सः सोशल मीडिया)
Yavatmal Agriculture Scheme: राज्य के सहकार एवं वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा ‘महा-रेशम अभियान 2026’ लागू करने संबंधी शासन निर्णय जारी किया गया है। इसके तहत जिले में नई शहतूत (तुती) खेती शुरू करने के इच्छुक किसानों का पंजीकरण 5 मार्च तक किया जाएगा। इसके लिए ‘आपले सरकार’ पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कृषि विभाग ने किसानों से समय रहते नई तुती लागवड़ के लिए पंजीकरण करने की अपील की है।
राज्य में शहतूत की खेती कर किसान रेशम कोकून (कोष) उत्पादन से अच्छा लाभ अर्जित कर रहे हैं। रेशम उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण होने के कारण इस क्षेत्र में निरंतर वृद्धि हो रही है। एक एकड़ शहतूत की खेती से दूसरे वर्ष से ही दो लाख रुपये से अधिक की आय किसान प्राप्त कर रहे हैं। बढ़ते उत्पादन को देखते हुए जालना, बीड, बडनेरा, सोलापुर, बारामती और नागपुर में कोकून बाजार स्थापित किए गए हैं। शासन की किसानों की आय दोगुनी करने की नीति को इस उद्योग से मजबूती मिल रही है।
मनरेगा के तहत 4.32 लाख रुपये तक सहायता
रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा/जी-राम-जी) के अंतर्गत अल्पभूधारक किसानों को एक एकड़ शहतूत की खेती, रखरखाव और कीट पालन गृह के लिए तीन वर्षों में कुल 895 मानव-दिवस की मजदूरी दी जाती है। इसमें मजदूरी के रूप में 2,79,240 रुपये और सामग्री मद में 1,53,000 रुपये, यानी कुल 4,32,240 रुपये का अनुदान प्रदान किया जाता है।
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‘सिल्क समग्र’ और ‘पोकरा’ योजनाओं से अतिरिक्त लाभ
केंद्र प्रायोजित ‘सिल्क समग्र’ योजना के अंतर्गत प्रति एकड़ शहतूत की खेती के लिए 45,000 रुपये, सिंचाई सेट के लिए 45,000 रुपये, कीट पालन गृह के लिए 2,43,750 रुपये, पालन सामग्री के लिए 37,500 रुपये तथा कीटाणुनाशक दवाओं के लिए 3,750 रुपये कुल मिलाकर 3,75,000 रुपये का अनुदान दिया जाता है। बहुभूधारक किसानों के लिए ‘सिल्क समग्र-2’ योजना के तहत दो एकड़ तक शहतूत की खेती की जा सकती है, जिसके लिए कुल 5,62,500 रुपये का अनुदान उपलब्ध है।
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ऑनलाइन आवेदन
इसके अतिरिक्त, कृषि विभाग की नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी योजना (पोकरा) के अंतर्गत शहतूत की खेती के लिए 45,000 रुपये, रेशम कीट पालन गृह के लिए 2,43,750 रुपये तथा पालन सामग्री के लिए 36,375 रुपये कुल 3,25,125 रुपये का अनुदान दिया जाता है। जिले के 559 गांवों में पोकरा योजना लागू है, जिसके लिए किसानों को कृषि विभाग के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। मनरेगा (जी-राम-जी) एवं सिल्क समग्र योजनाओं से संबंधित अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए किसान जिला रेशम कार्यालय, प्रशासनिक भवन, जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में संपर्क कर सकते हैं, ऐसा आवाहन जिला रेशम अधिकारी ने किया है।
