मृतकों के साथ भी सरकारी लापरवाही, यवतमाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर गंभीर सवाल, फ्रीजर फेल होने से शव हुआ खराब

Yavatmal Government Hospital: यवतमाल के शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शवागार का फ्रीजर बंद होने से एक शव सड़ गया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।
Government negligence extends even to the deceased; serious questions raised against Yavatmal Medical College Hospital as a body decomposed due to freezer failure.
यवतमाल, शासकीय अस्पताल, शवागार, (सोर्स- नवभारत फाइल फोटो)
Published on
Updated on

Yavatmal Government Medical College: यवतमाल वसंतराव नाईक शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है। अस्पताल के शवागार में अचानक बंद पड़े फ्रीजर में रखे एक शव के सड़ जाने से परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और शवागार की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार, खोजा कॉलोनी निवासी मनीष दिवाकर वाघमारे (58) को 7 जुलाई को अचानक हृदयाघात का दौरा पड़ गया था। परिजन उन्हें उपचार के लिए पहले संजीवनी अस्पताल ले गए, जहां ईसीजी जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए उनका शव वसंतराव नाईक शासकीय अस्पताल लाया गया और शवागार के फ्रीजर में रखा गया।

शवागार की लापरवाही से सड़ा शव, परिजनों का हंगामा

परिजनों का आरोप है कि वे शव को समुदाय के जमातखाने में उपलब्ध फ्रीजर में रखना चाहते थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि शव को अस्पताल के शवागार में सुरक्षित रखा जाएगा और अगले दिन पोस्टमार्टम कर दिया जाएगा।

प्रशासन के आश्वासन पर परिजनों ने शव अस्पताल के शवागार में ही रखने की अनुमति दी। बुधवार दोपहर जब परिजन शव लेने शवागार पहुंचे तो फ्रीजर में रखा शव पूरी तरह से सड़ चुका था। यह देखकर परिजन भड़क उठे और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

सूत्रों के अनुसार, अस्पताल के शवागार में कुल 18 फ्रीजर उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल 6 फ्रीजर ही चालू हालत में हैं। हैरानी की बात यह है कि चालू फ्रीजरों में भी तीन फ्रीजरों की ट्रॉलियां पूरी तरह जाम हैं, जिससे उनमें रखे शवों को बाहर निकालने में भी भारी परेशानी होती है। ऐसे में शवागार की तकनीकी और रखरखाव संबंधी व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों की उपअधिष्ठाता से भी हुई तीखी बहस

घटना से आक्रोशित परिजनों ने शवागार परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति को शांत कराने पहुंचे अस्पताल के उपअधिष्ठाता डॉ। सुरेंद्र भुयार के साथ भी परिजनों की तीखी बहस हुई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

112 पर हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची

शवागार परिसर में परिजनों द्वारा हंगामा किए जाने की सूचना मिलते ही लोहारा पुलिस थाने की डायल 112 सेवा में तैनात महिला पुलिस कर्मी अश्विनी राऊत तत्काल घटनास्थल पर पहुंचीं।

इसके कुछ ही देर बाद शहर पुलिस थाने के प्रभारी नीलेश सुरडकर अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस ने परिजनों को शांत कराया तथा मामले में विधिसम्मत कार्रवाई का आश्वासन दिया।

शव का पहले से ही विघटन होने का अनुमान

यवतमाल जिला अस्पताल के शवगृह में छह शव रखने के लिए एक कैबिनेट होता है और उसका केवल एक मुख्य स्विच होता है। शवगृह में लाए जाने से पहले संबंधित शव की मृत्यु कितने समय पहले हुई थी। इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, उसी बॉडी कैबिनेट में रखे अन्य शव सुरक्षित अवस्था में होने की जानकारी मिली है। संभावना है कि शवगृह में लाने से पहले ही संबंधित शव का विघटन (सड़ने की प्रक्रिया) शुरू हो चुका था।

- वसंतराव नाईक शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, अधिष्ठाता, डॉ. प्रशांत उईके

Navbharat Live
navbharatlive.com