यवतमाल दारव्हा अपडेट: खुले तेल और दूध में मिलावट की आशंका, FDA की कड़ाही के डर से बाजार से स्टॉक अंडरग्राउंड

Yavatmal FDA Maharashtra: FDA की कार्रवाई के बाद यवतमाल के ग्रामीण बाजारों में कई खाद्य उत्पाद दुकानों से गायब हो गए हैं। बिना लेबल और बिना लाइसेंस बिकने वाले उत्पादों को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है।
Yavatmal-Darwha Update: Suspected adulteration in loose oil and milk; stocks go underground to evade FDA crackdown.
यवतमाल, एफडीए, खाद्य सुरक्षा, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Yavatmal FDA Raids Food Safety: यवतमाल जिले के दारव्हा में राज्य में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा चलाए जा रहे छापेमारी अभियान के बाद तालुका सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे हैं। प्रतिबंधित गुटखा खरा और सुगंधित तंबाकू के साथ-साथ खुले खाद्य तेल दूध के पैकेट, चॉकलेट, वेफर्स और अन्य खाद्य सामग्री अचानक दुकानों से गायब होने लगी है इससे आम उपभोक्ताओं में भ्रम और नाराजगी का माहौल है।

ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक नागरिकों का कहना है कि वे वर्षों से खुले खाद्य तेल का उपयोग कर रहे हैं लेकिन उसमें भी मिलावट हो सकती है इसकी उन्हें कभी कल्पना नहीं थी यदि मिलावटी खाद्य पदार्थ बड़े पैमाने पर बाजार में बेचे जा रहे हैं तो यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से खिलवाड़ है।

ग्रामीण क्षेत्रों की किराना दुकानों, छोटी पान टपरियों पर बिना लाइसेंस संचालित बेकरी में तैयार होने वाले चॉकलेट, मिठाई, पेड़े, बर्फी, मैसूर, ब्रेड और टोस्ट की बड़े पैमाने पर बिक्री होती है ये उत्पाद बच्चों की पहली पसंद होने के कारण ग्रामीण बाजारों में इनकी मांग अधिक रहती है हालांकि, इनमें से कई उत्पादों पर निर्माता का नाम निर्माण तिथि एक्सपायरी डेट तथा सुरक्षा का लाइसेंस नंबर तक अंकित नहीं होता।

एफडीए कार्रवाई के बाद खाद्य सुरक्षा पर सवाल

एफडीए की कार्रवाई शुरू होने के बाद ऐसे कई उत्पाद अचानक दुकानों से गायब हो गए हैं बच्चों को आकर्षित करने वाले चॉकलेट, वेफर्स और अन्य खाद्य सामग्री के बाजार से गायब होने पर अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है लोगों का कहना है कि आखिर अब तक उनके बच्चे क्या खा रहे थे इन उत्पादों की गुणवत्ता की जांच होती थी या नहीं और क्या इनके पास आवश्यक अनुमति थी?

इस बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि अब तक इस प्रकार की मिलावट पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई क्या संबंधित विभाग नियमित रूप से खाद्य पदार्थों की जांच करता था? छापेमारी अभियान के बाद लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर मिलावट करने वालों को अब तक संरक्षण क्यों मिलता रहा।

नागरिकों ने मिलावट करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने वाले सभी खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी प्रयोगशाला जांच कराने की मांग की है विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों की व्यापक जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग जोर पकड़ रही है।

दुकानदारों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देने की मांग

ग्रामीण किराना व्यवसायियों का कहना है कि वे बड़े व्यापारियों या संबंधित एजेंसियों से माल खरीदते हैं कोई उत्पाद मिलावटी है या नहीं इसकी जानकारी उन्हें भी नहीं होती किस उत्पाद के लिए FSSAI लाइसेंस आवश्यक है कौन-सा उत्पाद वैध है और कौन-सा अवैध, इस संबंध में पर्याप्त मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। व्यवसाथियों ने मांग की है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग दुकानदारों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और यह जानकारी उपलब्ध कराए कि कौन-सी वस्तुएं बिक्री के लिए उपयुक्त हैं और किन वस्तुओं की बिक्री प्रतिबंधित है।

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