Yavatmal: अब सब कुछ रबी पर निर्भर, सीजन में गेहूं का क्षेत्र बढ़ेगा, चने की बुवाई सीमित
Yavatmal News: इस साल की भारी बारिश में जिले की लगभग सभी प्रमुख फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गईं। कई खेतों में तो मिट्टी तक बह गई। अब इस नुकसान से उबरने के लिए किसानों की उम्मीदें रबी सीजन पर टिकी हैं।
- Written By: प्रिया जैस
यवतमाल न्यूज
Yavatmal News: कृषि विभाग ने भी इस बार रबी की खेती का व्यापक नियोजन किया है। विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, पिछले तीन वर्षों की तुलना में इस साल रबी फसलों की बुवाई का क्षेत्र 12 हजार हेक्टेयर से अधिक बढ़ेगा। पिछले तीन वर्षों में जिले में औसतन 1, 88, 674 हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई होती थी। जबकि इस बार 2, 01, 491 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें बोई जाएंगी यानी करीब 12,817 हेक्टेयर की बढ़ोतरी होगी।
अतिवृष्टि से भरे जलाशय और बढ़े हुए भूजल स्तर के भरोसे किसान इस साल रबी फसलों की बुवाई बढ़ाने का जोखिम उठाने को तैयार हैं। मौसम के रुख को देखते हुए, किसानों के गेहूं की ओर झुकाव बढ़ रहा है, जबकि चने की बुवाई कुछ कम होगी। पिछले वर्ष जिले में 1 लाख हेक्टेयर में चने की बुवाई हुई थी और 34 हजार हेक्टेयर में गेहूं की। इस बार इसका उलटा दृश्य देखने को मिल सकता है।
वैकल्पिक फसल अपनाने के मूड़ में
बारिश और बाढ़ की वजह से खरीफ की फसलें खेतों से बह गईं। किसानों ने खेतों को जोतकर तुरंत रबी की बुवाई करने की तैयारी की, लेकिन दिवाली तक जारी बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी। ज्यादा बारिश चने की फसल के लिए हानिकारक होती है। इससे फसल गलने या नष्ट होने का खतरा रहता है।
सम्बंधित ख़बरें
पुणे कृषि महाविद्यालय में ‘अजित दादा पवार देशी गाय केंद्र’ का नामकरण, महिला किसानों के रोजगार पर जोर
NEET पेपर लीक आरोपियों के घर कब चलेगा बुलडोजर? पूर्व विधायक आसिफ शेख का BJP से कड़वा सवाल
पुणे रिंग रोड के लिए 14 गांवों की जमीन अधिग्रहण प्रस्तावित, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत
पिंपरी-चिंचवड़ मनपा में वाहनों का बढ़ता काफिला विवादों में, ‘साइकिल डे’ योजना भी ठंडी पड़ी
पहले से ही खरीफ में नुकसान झेल चुके किसान अब दोबारा जोखिम नहीं लेना चाहते और वैकल्पिक फसलें अपनाने के मूड में हैं। इसी वजह से इस बार जिले में गेहूं की बुवाई में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। गेहूं और चने के बाद ज्वार का क्षेत्र भी बढ़ने की उम्मीद है।
रबी के लिए उपलब्ध खाद
| खाद प्रकार | उपलब्ध (टन) | बिक्री (टन) | शेष (टन) |
|---|---|---|---|
| यूरिया | 17,785 | 6,608 | 11,177 |
| डीएपी | 4,840 | 628 | 4,212 |
| एमओपी | 1,748 | 105 | 1,643 |
| संयुक्त | 19,056 | 2,676 | 16,380 |
| एसएसपी | 14,084 | 1,559 | 12,525 |
| कुल | 57,513 | 11,576 | 45,937 |
यह भी पढ़ें – नागपुर में एक ही दिन में 9 की धरपकड़, ट्रेनों में संतरे बेच रही थी गैंग, RPF की CIB का बड़ा एक्शन
संभावित बुवाई क्षेत्र
| फसल | क्षेत्र (हेक्टेयर) |
|---|---|
| गेहूं | 63,475 |
| चना | 1,24,432 |
| ज्वार | 4,500 |
| मक्का | 1,140 |
| करडई | 51 |
| तिल | 450 |
| कुल क्षेत्रफल | 2,01,491 हेक्टेयर |
