बौद्ध समुदाय की रिज़र्व ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा, प्रस्ताव से छेड़छाड़, रजिस्टर में हेराफेरी
Yavatmal Buddhist Land Dispute: बौद्ध समुदाय की रिज़र्व जमीन पर अवैध कब्ज़े और ग्राम पंचायत दस्तावेज़ों में फ़र्ज़ीवाड़े का मामला करंजखेड़ में उजागर हुआ है।
- Written By: आंचल लोखंडे
बौद्ध समुदाय की रिज़र्व ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Yavatmal News: महागांव तहसील के ग्राम करंजखेड़ में एक चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है। आरोप है कि ग्राम के पूर्व सरपंच और ग्राम सेवक ने मिलकर प्रोसीडिंग रजिस्टर, फ़ॉर्म-8 तथा मीटिंग के प्रस्तावों में जानबूझकर छेड़छाड़ कर बौद्ध समुदाय की रिज़र्व भूमि पर गैर-कानूनी कब्ज़े की साज़िश रची। यह ज़मीन कई पीढ़ियों से बौद्ध समुदाय के उपयोग में बताई जाती है। इस घटना के बाहर आते ही समुदाय में आक्रोश फैल गया है।
सोमवार, 1 दिसंबर को शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी के नेता भीमराव भालेराव के नेतृत्व में आशाबाई गणपत भालेराव, ताई गजानन कांबले, निर्मला ढगे, वनिता भालेराव, गंगाबाई कदम, नंदा कदम, राजाराम कदम समेत दर्जनों लोगों ने महागांव पंचायत समिति कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रस्ताव की तारीख में हेरफेर
शिकायत के अनुसार इस ज़मीन के परिवर्तन का निर्णय ग्राम पंचायत के प्रस्ताव क्रमांक 07 के तहत 12 मार्च 2021 को लिया गया दिखाया गया है, जबकि उस दिन ग्राम सभा की कोई बैठक हुई ही नहीं थी। रजिस्टर में तारीख मिटाकर फ़र्ज़ी प्रविष्टि की गई है। दरअसल, मीटिंग का असली नोटिस 18 मार्च को सदस्यों को भेजा गया और मीटिंग 25 मार्च को निर्धारित की गई थी। इस आधार पर 12 मार्च का दिखाया गया प्रस्ताव पूरी तरह से फर्जी बताया जा रहा है। समुदाय के सदस्यों ने छेड़छाड़ वाले दस्तावेज गट विकास अधिकारी को सौंपे हैं।
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फ़ॉर्म-8 में मालिकाना हक़ से छेड़छाड़
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दलित बस्ती सुधार योजना के तहत यहां सड़कों और नालियों का निर्माण हुआ था और बीच में समुदाय का पीने के पानी का कुआँ भी है। इसके बावजूद फ़ॉर्म-8 में हेराफेरी कर जमीन किसी अन्य के नाम पर अवैध रूप से दर्ज की गई। शिकायतकर्ताओं ने रजिस्टर और प्रमाणों की प्रतियां भी शासन को सौंपी हैं।
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अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत?
आरोप है कि तत्कालीन सरपंच, ग्राम सेवक और लाभार्थी व्यक्ति ने संयुक्त रूप से साज़िश रचकर इस जमीन को हड़पने का प्रयास किया। न तो कार्यालय में कागजात उपलब्ध हैं और न ही पंचनामा, जिससे आशंका है कि पूरा घोटाला योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
“फ़र्जीवाड़ा सिद्ध हुआ तो एंट्री रद्द”-पूर्व सरपंच
प्रकरण में ज़मीन ग्राम पंचायत की क्लास-2 भूमि है, जिसे वर्ष 2021 में किसी विशेष व्यक्ति के नाम पर दर्ज किया गया था। पूर्व सरपंच तथा ग्राम पंचायत सदस्य प्रवीण ठाकरे ने कहा कि “दस्तावेज जांच के बाद यदि फ़र्जीवाड़ा सिद्ध होता है तो प्रविष्टि निश्चित रूप से रद्द की जाएगी।” उन्होंने बताया कि चुनाव के कारण मासिक बैठक में देरी हुई है। आगामी बैठक में सभी पहलुओं पर निर्णय लिया जाएगा।
