कौन थे DY Patil? खुद इंजीनियर नहीं बने पर, लाखों इंजीनियरों का सपना किया पूरा, खड़ा किया सबसे बड़ा एजुकेशन हब
Who Was DY Patil: देश के जाने-माने शिक्षाविद और पूर्व राज्यपाल डॉ. डी. वाई. पाटिल का निधन हो गया। जानिए कैसे एक साधारण शुरुआत के साथ उन्होंने देश का सबसे बड़ा एजुकेशन हब खड़ा कर दिया।
- Written By: आकाश मसने
डॉ. डी वाई पाटिल (डिजाइन फोटो)
DY Patil Group Founder Story: भारत के शिक्षा जगत और राजनीति के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। देश के सबसे बड़े निजी शैक्षणिक नेटवर्कों में से एक डी वाई पाटिल ग्रुप के संस्थापक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और त्रिपुरा, बिहार व पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल का 4 अगस्त 2026 को कोल्हापुर में निधन हो गया। 90 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1991 में ‘पद्म श्री’ सम्मान से नवाजा था। लेकिन उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि उन्होंने शून्य से शुरुआत करके एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया, जिसने भारत में निजी उच्च शिक्षा की परिभाषा को हमेशा के लिए बदल दिया।
कोल्हापुर के एक साधारण कॉलेज से हुई थी शुरुआत
डॉ. डी. वाई. पाटिल का जन्म 22 अक्टूबर 1935 को महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट 1980 के दशक में आया। उस दौर में देश में तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा पर पूरी तरह सरकारी नियंत्रण था और सीटें बेहद सीमित थीं। मिडिल क्लास बच्चों के लिए डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना देखना भी मुश्किल था।
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इस कमी को भांपते हुए डॉ. पाटिल ने देश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का संकल्प लिया। उन्होंने साल 1983 में कोल्हापुर में अपने पहले निजी इंजीनियरिंग कॉलेज की नींव रखी। शुरुआत बेहद मामूली थी, संसाधन कम थे, लेकिन उनका विजन बहुत बड़ा था।
ऐसे बना देश का सबसे बड़ा एजुकेशन हब
एक बार जब कोल्हापुर में पहला कॉलेज सफल हुआ, तो डॉ. डी. वाई. पाटिल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों पुणे, मुंबई और नवी मुंबई का रुख किया। एक इंजीनियरिंग कॉलेज से शुरू हुआ यह सफर आज 182 से अधिक शिक्षण संस्थानों तक पहुंच चुका है।
उनके ग्रुप के तहत आज देश में 7 मान्यता प्राप्त डीम्ड विश्वविद्यालय काम कर रहे हैं, जहां केजी से लेकर पीजी और पीएचडी तक की पढ़ाई होती है। आज इस एजुकेशन हब से इंजीनियरिंग, मेडिकल, डेंटिस्ट्री, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर, और नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में हर साल हजारों छात्र डिग्री लेकर निकलते हैं।
डॉ डी वाई पाटिल एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स, आकुर्डी, पुणे (सोर्स: सोशल मीडिया)
शिक्षा से आगे: खेल और स्वास्थ्य में भी लहराया परचम
डॉ. डी. वाई. पाटिल का विजन सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं था। वे युवाओं के सर्वांगीण विकास पर भरोसा करते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने नवी मुंबई के नेरुल में विश्व प्रसिद्ध डीवाई पाटिल स्टेडियम का निर्माण करवाया। यह स्टेडियम आज IPL, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों और वैश्विक स्तर के फुटबॉल व म्यूजिक कॉन्सर्ट का गवाह बनता है। इसके अलावा, उन्होंने समाज के गरीब तबके को सस्ती और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए कई मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल भी शुरू किए।
नवी मुंबई स्थित डॉ. डीवाई पाटिल स्टेडियम (सोर्स: सोशल मीडिया)
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राजनीति और प्रशासन में भी सर्वोच्च मुकाम
शिक्षा जगत के साथ-साथ डॉ. पाटिल राजनीति में भी एक बेहद सम्मानित नाम थे। वे कांग्रेस के एक कद्दावर नेता रहे और महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य के रूप में राज्य सरकार में मंत्री पद भी संभाला। उनके प्रशासनिक कौशल को देखते हुए उन्हें त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने बेहद गरिमा के साथ अपना कार्यकाल पूरा किया।
डॉ. डी. वाई. पाटिल आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका खड़ा किया हुआ यह विशाल एजुकेशनल एम्पायर और शिक्षा की अलख, आने वाली कई पीढ़ियों का भविष्य संवारती रहेगी। उनके सुपुत्र और महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता सतेज पाटिल और उनका पूरा परिवार इस महान विरासत को आगे बढ़ाएंगे।
