वाशिम में खरीफ सीजन की तैयारी में जुटे किसान, खेती के मशागती कार्यों के लिए ट्रैक्टर को मिल रही है प्राथमिकता
Washim News: वाशिम जिले में खरीफ सीजन के लिए मशागती कार्य तेज। समय की बचत और मजदूरों की कमी के कारण किसान बैलजोड़ियों के बजाय ट्रैक्टर से जुताई को दे रहे हैं प्राथमिकता
Washim Kharif Season Farming: वाशिम रबी सीजन अब समाप्ति की ओर है और जून माह में खरीफ सीजन की शुरुआत होने वाली है। इसी के पूर्व जिले के किसान खेती के मशागती कार्यों में जुट गए हैं। खरीफ सीजन में कपास, सोयाबीन, तुअर और उड़द जैसी फसलें बड़े पैमाने पर ली जाती हैं।
अच्छी पैदावार के लिए किसान जमीन की जुताई कर पिछली फसल के अवशेष मिट्टी में मिला रहे हैं। अप्रैल माह की गर्मी में जुताई करने से मानसून के दौरान मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम उगते हैं। पहले यह कार्य बैलजोड़ियों से किया जाता था, लेकिन मजदूरी में वृद्धि और मजदूरों की कमी के कारण अब किसान आधुनिक यंत्रों का उपयोग कर रहे हैं।
ट्रैक्टर से एक घंटे में 2 से 3 एकड़ जमीन की जुताई संभव है, जिससे कम समय में अधिक क्षेत्र तैयार हो रहा है। गर्मी में जुताई का एक लाभ यह भी है कि मिट्टी के कीड़े और खरपतवार की जड़ें नष्ट हो जाती हैं। कुछ छोटे किसान पड़ोसी किसानों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से ट्रैक्टर लेकर मशागती कार्य कर रहे हैं।
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वर्तमान में ट्रैक्टर से जुताई का दर प्रति एकड़ 1200 से 1500 रुपये तक है। 7 जून को मृग नक्षत्र का प्रारंभसामान्यतः 7 जून को मृग नक्षत्र प्रारंभ होता है और उससे पहले खेतों को तैयार कर वर्षा की प्रतीक्षा की जाती है। यदि समय पर अच्छी बारिश हुई तो बुआई कार्य तेजी से हो सकेगा।
पिछले वर्ष कुछ किसानों को सोयाबीन और तुअर की अपेक्षित पैदावार नहीं मिली थी, इसलिए सिंचित क्षेत्रों में गेहूं की बुआई पर जोर दिया गया। इन दिनों किसान खेती के लिए आर्थिक व्यवस्था जुटाने के साथ ही खाद और बीजों की खरीदी की तैयारी भी कर रहे हैं। पशुचारे की समस्या और बैलों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए किसान अब यांत्रिक पद्धति से खेती करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
