तिरोड़ा: सिंचाई के अभाव में सूख रही रबी धान की फसल, धापेवाड़ा प्रकल्प के खिलाफ 42 गांवों के किसानों का आक्रोश
तिरोड़ा तहसील के 42 गांवों में रबी धान फसल सूख रही है। धापेवाड़ा उपसा सिंचाई प्रकल्प की नहरों में पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
Gondia Dhapewada Project News: तिरोड़ा तहसील के कवलेवाड़ा के निकट वैनगंगा नदी पर स्थित धापेवाड़ा उपसा सिंचाई प्रकल्प की नहरों में नियमित अंतराल पर पानी नहीं छोड़े जाने की वजह से तहसील के 42 गांवों में रबी धान फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है। सिंचाई के लिए पानी के अभाव के कारण खेतों की जमीनों में दरारें पड़ गई हैं। परिसर के सैकड़ों किसानों के हरेभरे रबी धान के पौधे खेतों में सूखकर पीले पड़ रहे हैं। जिससे किसान परेशान हो गए हैं।
किसानों का आरोप है कि प्रकल्प अधिकारियों की अनदेखी के कारण ये नौबत आई है। परिसर के चांदोरी, बिरोली, भंभोड़ी, सालेबर्डी सहित क्षेत्र के अनेक किसानों ने बताया कि उनके खेतों को सिंचाई के लिए नहर से विगत 4 अप्रैल को पानी दिया गया था, लेकिन वह अंतिम छोर टेल तक नहीं पहुंचा।
अब इतने दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक इस क्षेत्र के खेतों में पानी उपलब्ध नहीं कराया गया। परियोजना विभाग की अनदेखी के चलते किसानों की फसल बर्बाद हो रही है।
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बताया गया कि धापेवाड़ा प्रकल्प से गोंदिया, तिरोड़ा और गोरेगांव तहसील के 42 गांवों को सिंचाई का पानी मिलता है। इस साल 12 हजार हेक्टेयर में बुआई इस साल रबी सीजन में 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई।
नियमानुसार जनवरी से नियमित अवधि में पानी दिया जाना चाहिए था, लेकिन किसानों का कहना है कि कवलेवाड़ा डैम में पानी उपलब्ध रहने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा हर साल बिजली नहीं है, मोटर खराब है आदि बहाने बताकर नहर में पानी नहीं छोड़ा गया, जिसके कारण सिंचाई के अभाव में जमीन और धान पौधे सूखकर नष्ट हो रहे हैं।
पानी नहीं छोड़ा गया, तो आंदोलन करेंगे
परिसर के किसानों ने कहा कि परियोजना विभाग की अनदेखी के कारण सरकार की जलयुक्त शिवार योजना सिर्फ कागजों पर चल रही है, जिसके कारण भी किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान देकर डैम से तत्काल नहरों में पानी छोड़ने और विभाग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग किसानों ने की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो सभी पीड़ित किसानों द्वारा तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
