प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Wardha Water Crisis News: वर्धा गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और आगामी दिनों में जिले के कई गांवों में जलसंकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। इससे निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से तैयार हो गया है। जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग द्वारा तैयार किए गए कार्ययोजना प्रारूप को जिलाधिकारी ने मंजूरी दे दी है। इस प्रारूप के अनुसार जिले की 8 तहसीलों के लगभग 757 गांवों में जलसंकट के आसार व्यक्त किए गए हैं। इन गांवों में 876 उपाय योजनाओं को लागू किया जाएगा। संबंधित विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
जिले में मध्यम, छोटे और बड़े कुल 11 जलाशय हैं, जिनमें वर्तमान में लगभग 55 प्रश जलसंग्रह उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त 21 लघु प्रकल्प भी हैं, हालांकि अप्रैल के अंत तक अधिकांश लघु प्रकल्प सूख जाते हैं। इन 11 मध्यम, छोटे और बड़े प्रकल्पों में से कुछ जलाशयों का पानी पेयजल और सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाता है। गर्मी के दिनों में जलाशयों का जलस्तर तेजी से घटता है।
इसे ध्यान में रखते हुए जल का समुचित नियोजन किया जा रहा है। कुछ गांवों में गंभीर स्थिति उत्पन्न होने की संभावना को देखते हुए संभावित कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत नई बोरवेल का निर्माण, बोरवेल की मरम्मत, निजी कुओं का अधिग्रहण, सार्वजनिक कुओं का गहरीकरण, नल जल योजना की विशेष मरम्मत तथा आवश्यकता अनुसार टैंकर से जलापूर्ति जैसे कार्य किए जाएंगे।
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वर्धा जिले में इस वर्ष दो चरणों में कार्ययोजना तैयार की गई है। पहला चरण 1 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक रहेगा। इस चरण में 489 गांवों में 554 कार्य किए जाएंगे, जिन पर 2153.55 लाख रुपये का अनुमानित खर्च होगा, दूसरा चरण 1 अप्रैल से 30 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान 268 गांवों में 322 कार्य किए जाएंगे, जिन पर 1416.70 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। दोनों चरणों में कुल 876 उपाय योजनाओं पर 3570.25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे, यह जानकारी विभाग द्वारा दी गई है।
गर्मी के दिनों में जिले के कुछ हिस्सों में मई और जून के पखवाड़े तक स्थिति विकट हो जाती है। आर्वी, आष्टी, कारंजा, समुद्रपुर और हिंगनघाट तहसील के कुछ गांवों में पेयजल के लिए लोगों को भटकना पड़ता है। आष्टी तहसील के कुछ गांव ऐसे हैं, जहां भीषण गर्मी के दौरान गोपालक और ग्रामीणों को अन्य गांवों में अस्थायी रूप से स्थानांतरित होना पड़ता है। इन क्षेत्रों में अब तक स्थायी उपाययोजना करने में प्रशासन सफल नहीं हो पाया है।