नागपुर मनपा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
NMC Roster Scam: नागपुर महानगरपालिका में हर दूसरे दिन किसी न किसी विवाद के चलते सुर्खियों में रहती है। इसी तरह का एक मामला उस समय उजागर हुआ जब रोस्टर में गड़बड़ी किए जाने के चलते एक एससी कर्मचारी से कोष्टी जाति का प्रमाणपत्र मांगा गया। हालात इस तरह कर दिए गए कि मानसिक प्रताड़ना के चलते इस कर्मचारी को जान गंवानी पड़ी।
मृत कर्मचारी विशाल पौनीकर की पत्नी दीपाली ने इस आरोप के साथ जोन-2 के पुलिस उपायुक्त को एक लिखित शिकायत सौंपकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। दीपाली ने कहा कि मनपा की बेतरतीब कार्यप्रणाली हमेशा से संदेह के घेरे में रही है।
इसी तरह का यह मामला है। एससी कैटेगरी में नियुक्ति होने के बाद मनपा ने स्वयं ही रोस्टर बदलकर उसे एसबीसी में डाल दिया। यहां तक कि बाद में उसे खुले वर्ग में स्थानांतरित कर दिया गया।
नागपुर जिला महानगरपालिका कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष राहुल झामरे ने कहा कि विशाल की पत्नी द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार मनपा के धंतोली जोन क्र. 4 में कर संग्राहक के पद पर विशाल कार्यरत था। उसकी नियुक्ति 2015 में अनुकंपा के आधार पर अनुसूचित जाति (महार) वर्ग से हुई थी।
यहां तक कि वर्ष 2018 में उसे महानगरपालिका ने ही इसी श्रेणी के तहत पदोन्नति भी प्रदान की थी। पीड़िता का आरोप है कि साल 2025 में मनपा के तत्कालीन अधिकारियों ने जानबूझकर ‘बिंदु नामावली’ (रोस्टर) में बदलाव किया और विशाल के सेवा रिकॉर्ड में उनकी जाति को अनुसूचित जाति से बदलकर ‘विमुक्त’ (विशेष पिछड़ा वर्ग) दिखा दिया।
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इतना ही नहीं, उनसे जाति वैधता प्रमाणपत्र की भी मांग की गई। जब विशाल ने इस अन्याय के खिलाफ शिकायत की तो जून 2025 में प्रशासन ने एक और चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए उनके संवर्ग को ‘खुला प्रवर्ग’ में डाल दिया।
दीपाली पौनीकर का दावा है कि जाति संवर्ग में इस अवैध बदलाव और अधिकारियों द्वारा बार-बार किए जा रहे उत्पीड़न के कारण उनके पति गहरे मानसिक तनाव में रहने लगे थे। इसी मानसिक आघात और सदमे के कारण नवंबर 2025 में उनका असामयिक निधन हो गया।
उन्होंने कहा कि जब उनके पति की जाति ही अनुसूचित है तो वे किस आधार पर एसबीसी का जाति वैधता प्रमाणपत्र लाकर देते लेकिन इसके लिए उन्हें परेशान किया जाता रहा।
अधिवक्ता झामरे ने कहा कि 2009 में सरकार की ओर से कानून पारित किया गया जिसमें रोस्टर में बदलाव कर गड़बड़ी को अंजाम देने वाले अधिकारी को 90 दिन की सजा का प्रावधान किया गया। अब महानगरपालिका को इस संदर्भ में जांच कर कार्रवाई को अंजाम देना है। दीपाली ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि इस पूरे षड्यंत्र के कारण उनका परिवार तबाह हो गया है।