वर्धा न्यूज
Retired Teachers Pension Delay: नवंबर तथा दिसंबर के बाद तीसरा महीना समाप्त होने आया है। फिर भी हक की पेंशन नहीं मिलने के कारण इन दिनों स्थानीय नगर परिषद के सेवानिवृत्त शिक्षकों के परिवारों पर आर्थिक संकट निर्माण हो गया है। नियमित पेंशन नहीं मिलने के कारण जीवनयापन कैसे करें, ऐसा सवाल उपस्थित किया जा रहा है।
एक समय ऐसा था जब शहर के लगभग 90 प्रश विद्यार्थी पढ़ाई के लिए नप द्वारा संचालित सरकारी स्कूलों पर निर्भर होते थे। जिससे स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या भी बड़ी थी। लेकिन कान्वेंट संस्कृति का प्रभाव बढ़ने से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की कमी की वजह से कुछ स्कूले बंद हो गई है।
फिर भी वर्तमान समय में वर्धा नगर परिषद के अंतर्गत शहर में 10 प्राथमिक स्कूल कार्यरत है। जिसमें एक माध्यमिक स्कूल का समावेश है। हालांकि, माध्यमिक स्कूल में कार्यरत शिक्षकों का वेतन नगर परिषद नहीं देती लेकिन सभी प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के वेतन की जिम्मेदानी नगर परिषद प्रशासन पर ही है।
वर्धा नगर परिषद संचालित प्राथमिक स्कूलों से सेवानिवृत्त शिक्षकों के 115 परिवार पेंशन लेते हैं। जिसमें 71 सेवानिवृत्त शिक्षक तथा 44 परिवार सेवानिवृत्तों का समावेश है। वृद्ध शिक्षकों को पेंशन ही जीवनयापन का एकमेव माध्यम है। किंतु, सेवानिवृत्तों को पेंशन समय पर नहीं दिया जाता यह गंभीर समस्या निर्माण हुई है।
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नवंबर तथा दिसंबर इन 2 महीने बीत गए़ जनवरी का महीना समाप्त होने पर आ गया है। फिर भी शिक्षकों को पेंशन नहीं मिला है। जिसके कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। संबंधित प्रशासन ने ध्यान देने की मांग की जा रही है।
नगर परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन के लिए सरकार की ओर से अनुदान प्राप्त होता है। सरकार से अनुदान मिलने के बाद जल्द ही अनुदान वितरित किया जाएगा।
स्कूलों में सेवा देकर निवृत्त होने के बाद हमारे पास केवल पेंशन ही एकमात्र जीवनयापन का माध्यम है। समय पर पेंशन मिलना हमारा अधिकार है। तीन महीने होते आ रहे हैं। हमें पेंशन से वंचित रखा जा रहा है। आज वृद्धावस्था में हम काम नहीं कर सकते। ऐसे में अस्पताल की फीस, दवाई के साथ ही सब्जी, किराणा आदि जीवनावश्यक खर्च कैसे करें, यह प्रश्न निर्माण हो गया है। हमें नियमित पेंशन प्रदान करें।
– नवभारत लाइव पर वर्धा से पवन काकडे की रिपोर्ट