

Wardha Forensic Laboratory: वर्धा जिले में कानून-व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने वर्धा में लघु न्यायवैधक वैज्ञानिक प्रयोगशाला, सुसज्जित निवासी प्रशिक्षण केंद्र तथा मोबाइल प्रकारण के लिए विशेष उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में गृह विभाग ने 4 मार्च को शासन आदेश जारी किया है।
यह पहल जिले के पालकमंत्री तथा राज्य के गृह राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने वर्धा जिले में शराबबंदी और बढ़ते आपराधिक मामलों की स्थिति को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष प्रमुखता से रखा था। मुख्यमंत्री ने इस मांग को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए पिछले माह मंत्रिमंडल बैठक में वर्धा में उक्त संस्थाओं की स्थापना का निर्णय लिया।
वर्धा जिले में 30 अप्रैल 1975 से शराबबंदी लागू है। पिछले दस वर्षों (2014–2024) में शराबबंदी से संबंधित 93,554 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 51,340 मामलों का निपटारा हो चुका है, 674 मामलों में अपराध सिद्ध हुआ है, जबकि 50,666 मामलों में आरोपियों को निर्दोष बरी किया गया है।
इसके अतिरिक्त अन्य आपराधिक मामलों में भी वृद्धि हुई है और अपराधी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान में जब्त नमूनों की जांच के लिए वर्धा सहित नागपुर शहर, नागपुर ग्रामीण, भंडारा और गोंदिया जिलों के नमूने नागपुर स्थित प्रादेशिक न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशाला भेजे जाते हैं, जिससे रिपोर्ट में देरी होती है।
नई लघु न्यायवैधक वैज्ञानिक प्रयोगशाला में कुल 67 पद स्वीकृत किए गए हैं। इससे मामलों की जांच में तेजी आएगी और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निपटारा संभव हो सकेगा।