वर्धा में जलसंकट की अग्रिम तैयारी: 757 गांवों के लिए 876 उपाययोजनाएं मंजूर, निजी कुओं के अधिग्रहण के निर्देश
Water Crisis Wardha: वर्धा प्रशासन ने 757 गांवों में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए 876 उपायों वाले कृति प्रारूप को मंजूरी दी है। इसमें कुओं का अधिग्रहण, गहरीकरण और नई बोरवेल का निर्माण शामिल है।
- Written By: रूपम सिंह
Water Crisis Wardha (सोर्स- सोशल मीडिया)
Wardha Zilla Parishad Water Plan: वर्धा जिले में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक कृति प्रारूप को मंजूरी दे दी है। दो चरणों में तैयार इस योजना के अनुसार जिले के लगभग 757 गांवों में पानी की कमी की आशंका जताई गई है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव और मार्च अंत तक अधिकांश जलाशयों के सूखने या जलस्तर घटने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने अग्रिम तैयारी शुरू कर दी है। प्रारूप के तहत 876 उपाययोजनाओं को अमल में लाया जाएगा। इनमें 192 गांवों में 201 निजी कुओं का अधिग्रहण किया जाएगा, ताकि पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो।
इसके अलावा 103 गांवों में 147 सार्वजनिक कुओं का गहराईकरण, 302 गांवों में जलापूर्ति योजनाओं की विशेष मरम्मत के 324 कार्य तथा 154 गांवों में 198 नई बोरवेल निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। पुरानी बोरवेल की मरम्मत और आवश्यकतानुसार नई जलापूर्ति योजनाएं भी शुरू की जाएंगी। हर साल मार्च के अंत तक जिले के अधिकांश जलाशय सूख जाते हैं।
जबकि कुछ का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है। रबी फसलों को भी जल छोड़ना होता है। इससे जल वितरण व्यवस्था बाधित होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई हिस्सों में भीषण जलसंकट की स्थिति बनती दिख रही है। तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है और मई-जून में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन ने संबंधित विभागों को मंजूर कृति प्रारूप के अनुसार त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित गांवों में टैंकरों के माध्यम से भी जलापूर्ति की जाएगी।
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2 दिन बाध हो रही जलापूर्ति
वर्धा शहर और आसपास के 14 गांवों को महाकाली स्थित धाम नदी से पानी की आपूर्ति की जाती है। वर्तमान में यहां दो दिन में एक बार जलापूर्ति हो रही है और आने वाले दिनों में इसमें और कटौती की आशंका जताई जा रही है। वर्तमान में धाम प्रकल्प में 50 प्रश के करीब जल भंडारण है। मई अंत तक इसमें भारी कमी की आशंका है
जल संरक्षण में सहयोग की अपील
अधिकारियों का कहना है कि समय रहते उठाए जा रहे ये कदम जलसंकट की तीव्रता को कम करने में सहायक सिद्ध होंगे। साथ ही नागरिकों से भी जल संरक्षण में सहयोग करने की अपील की गई है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
