वर्धा में कर्मचारियों की बेमुदत हड़ताल से सरकारी कामकाज ठप, दूसरे दिन भी दफ्तरों में सन्नाटा
Wardha News: वर्धा में 21 अप्रैल से शुरू हुई सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल से प्रशासनिक कामकाज ठप है पुरानी पेंशन और अन्य मांगों को लेकर कर्मचारी डटे हुए हैं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है।
- Written By: रूपम सिंह
सरकारी कामकाज ठप (साेर्स: सोशल मीडिया)
Wardha Administrative Crisis News: वर्धा जिले में सरकारी, अर्धसरकारी, जिला परिषद, शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की बेमुदत हड़ताल के कारण दूसरे दिन भी सरकारी कार्यालयों में सन्नाटा छाया रहा। विभिन्न लंबित मांगों को लेकर यह आंदोलन 21 अप्रैल से शुरू किया गया है, जिसके चलते प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आंदोलन के दूसरे दिन बड़ी संख्या में कर्मचारी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर पुतला चौक पर एकत्र हुए और धरना प्रदर्शन किया।
हड़ताल में शामिल कर्मचारियों की भारी संख्या के कारण कई सरकारी दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, संशोधित राष्ट्रीय पेंशन योजना की अधिसूचना जारी करना, परीक्षा की अनिवार्यता को सभी शिक्षकों पर समान रूप से लागू न करना, चतुर्थ श्रेणी और वाहन चालक भर्ती पर लगी रोक हटाना शामिल है।
इसके अलावा कंत्राटी कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने, सभी कर्मचारियों के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा लागू करने, 10 20-30 आश्वासित प्रगति योजना लागू करने, 15 मार्च 2024 के शासन निर्णय को रद्द करने और PFDRDA कानून को समाप्त करने की भी मांग की जा रही है। आंदोलन में राज्य सरकारी कर्मचारी मध्यवर्ती संगठन, महसूल कर्मचारी संघ, माध्यमिक शिक्षक महामंडल, कृषि सहायक संगठन,
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स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, वन विभाग कर्मचारी संगठन सहित कई संगठनों के पदाधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हैं। हड़ताल के चलते विभिन्न शासकीय कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। जरूरी कार्यों के लिए आने वाले नागरिकों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ रहा है, जिससे आम जनता को भारी असुविधा हो रही है।
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निराश होकर लौट रहे नागरिक
हड़ताल के कारण सभी सरकारी दफ्तरों में खाली कुर्सियां दिखाई दे रही है। परिणाम वश अपने काम से आने वाले नागरीक निराश होकर वापिस लौट रहे है। पहले ही गर्मी के दिन है। विविध कामों के लिए वर्धा ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के नागरीक कार्यालयो में पहुंच रहे हैं। परंतु खाली कुर्सियां देख वे निराश होकर उलटे पाव लौटते नजर आ रहे हैं।
