Chhatrapati Sambhajinagar कचरा संकलन प्रोजेक्ट पर संकट, 1 मई की डेडलाइन और अधूरी तैयारी
Chhatrapati Sambhajinagar में 525 नए कचरा वाहनों का बेड़ा तैयार है, लेकिन ट्रांसफर स्टेशनों और चार्जिंग पॉइंट्स के अभाव में 1 मई से शुरू होने वाली सेवा पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
- Written By: गोरक्ष पोफली
छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhatrapati Sambhajinagar News: छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका (CSMC) की नई कचरा संकलन परियोजना अपनी शुरुआत से पहले ही विवादों और तकनीकी बाधाओं के घेरे में आ गई है। प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण कार्य का जिम्मा एक निजी कंपनी को सौंपा है, जिसने अपनी ओर से लगभग 525 आधुनिक वाहनों का बेड़ा तैयार कर लिया है। लेकिन विडंबना यह है कि इन वाहनों को संचालित करने के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं अभी तक कागजों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। ऐसे में 1 मई से इस सेवा के सुचारू रूप से शुरू होने पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।
ट्रांसफर स्टेशनों का बुरा हाल
परियोजना की सफलता के लिए एन-12, शिवाजी नगर और रामनगर में बनाए जा रहे ‘ट्रांसफर स्टेशन’ सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इन्हीं केंद्रों पर छोटे संकलन वाहनों से कचरा बड़े डंपरों में लोड किया जाना है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि इन स्टेशनों का काम अभी भी आधा-अधूरा पड़ा है। इन केंद्रों पर अभी तक ट्रांसफार्मर और डीपी (DP) नहीं लगाए गए हैं, जिसके बिना संचालन संभव नहीं है। कचरे की सही मात्रा मापने के लिए जरूरी वजन मशीनें (Weight Machines) भी स्थापित नहीं की गई हैं, जिससे भविष्य में भ्रष्टाचार और डेटा में हेरफेर की आशंका बढ़ गई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ‘चार्जिंग’ का ठिकाना नहीं
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कंपनी ने बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक वाहनों को बेड़े में शामिल किया है। लेकिन प्रशासन की अदूरदर्शिता का आलम यह है कि शहर में इन वाहनों के लिए एक भी समर्पित चार्जिंग स्टेशन तैयार नहीं है। बिना चार्जिंग सुविधा के ये वाहन केवल ‘शो-पीस’ बनकर रह जाएंगे। इसके अलावा, चिकलथाना और कांचनवाडी जैसे प्रस्तावित क्षेत्रों में तो काम शुरू तक नहीं हो सका है।
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विभागीय खींचतान और समन्वय की कमी
इस परियोजना की विफलता का सबसे बड़ा कारण महानगरपालिका के विभिन्न विभागों के बीच तालमेल का अभाव है। घनकचरा, यांत्रिकी, निर्माण और विद्युत विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपते नजर आ रहे हैं। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में निजी कंपनी भी असहाय महसूस कर रही है। यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है और प्रशासन की कार्यशैली पर जनता का भरोसा कम होना तय है।
