

Lower Wardha Project: निम्न वर्धा परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इन किसानों की खेती योग्य उपजाऊ भूमि आर्वी तहसील के मौजा मांडला क्षेत्र में स्थित है, जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरी हुई है। यह भूमि गांव से लगभग पांच किलोमीटर दूर है। बाघों सहित अन्य हिंसक एवं उपद्रवी वन्य प्राणियों के भय के कारण पिछले 25 से 30 वर्षों से किसान इस भूमि पर खेती नहीं कर पा रहे हैं।
पीड़ित किसानों की एकमुखी मांग है कि उनकी इस जमीन को शासन के पास जमा कर गांव के नजदीक किसी सुरक्षित स्थान पर शासन अथवा वन विभाग की कृषि भूमि उपलब्ध कराई जाए। किसानों का सवाल है कि क्या उनकी यह करुण पुकार शासन-प्रशासन तक पहुंचेगी या नहीं।
पिपरी (पुनर्वसन)-सालोड हिरापुर निवासी तथा निम्न वर्धा परियोजना से प्रभावित आदिवासी किसान श्रीधर गणपत उईके ने अपने परिवार की गंभीर स्थिति को लेकर कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कहीं से भी राहत नहीं मिली। अब उन्होंने अनिश्चितकालीन अन्नत्याग आंदोलन की चेतावनी दी है। उईके का कहना है कि वर्षों से जंगल में फंसी और हिंसक वन्यजीवों के आवागमन वाली उनकी पुश्तैनी भूमि के कारण उनका परिवार पूरी तरह बर्बाद हो गया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आर्थिक तंगी के चलते समय पर इलाज न हो पाने से उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई।
मौजा मांडला क्षेत्र में आदिवासी किसानों की लगभग 300 एकड़ भूमि है, जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरी हुई है। यह भूमि गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर है। बाघों और अन्य हिंसक वन्य प्राणियों के भय के कारण पिछले 25 से 30 वर्षों से यहां खेती नहीं हो पा रही है। उईके ने बताया कि एक समय यह काली उपजाऊ भूमि प्रति एकड़ 15 से 20 क्विंटल कपास का उत्पादन करती थी, लेकिन आज यह पूरी तरह बंजर पड़ी है।
उईके का कहना है कि यदि इस भूमि के बदले गांव के पास सुरक्षित स्थान पर जमीन या शासन द्वारा उचित मुआवजा मिला होता, तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सकती थी। वर्षों से दिए गए आवेदन प्रशासन द्वारा नजरअंदाज किए गए। इसी आर्थिक दबाव के चलते पत्नी पद्मा उईके के कैंसर इलाज के लिए लाखों रुपये का कर्ज लेना पड़ा। इलाज के लिए आगे पैसे न होने के कारण 2 मई 2023 को उनका निधन हो गया।
पत्नी के इलाज के लिए लिया गया कर्ज चुकाने के लिए उईके को वर्धा स्थित अपना घर और भूखंड बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचना पड़ा। इसके बावजूद कर्ज अब भी सिर पर है और आज उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है।
उईके ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगें शीघ्र पूरी नहीं की गईं, तो वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठेंगे। साथ ही उन्होंने आगामी चुनावों में मतदान बहिष्कार की चेतावनी भी दी है। अब यह देखना होगा कि शासन-प्रशासन इन व्यथित आदिवासी परिवारों की पीड़ा पर ध्यान देता है या नहीं।