विधान परिषद में गूंजा नासिक का MHADA घोटाला, अवैध सब-डिविजन मामले में 49 लोगों पर केस
Nashik MHADA: महाराष्ट्र विधान परिषद में शिवसेना नेता अनिल परब ने नासिक म्हाडा घोटाले का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर भूखंडों के अवैध उप-विभाजन से बड़ा घोटाला हुआ है।
- Written By: रूपम सिंह
नासिक म्हाडा घोटाला (सोर्स-सोशल मीडिया)
Nashik MHADA Scam Anil Parab Shiv Sena UBT: महाराष्ट्र विधान परिषद में नासिक सहित राज्य के विभिन्न महानगरपालिका क्षेत्रों में भूखंडों के कथित अवैध उप-विभाजन (सब-डिविजन) और म्हाडा से जुड़े मामलों को लेकर जोरदार चर्चा हुई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता अनिल परब ने आरोप लगाया कि बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत से करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया, जिससे सरकारी नियमों और सार्वजनिक हित को नुकसान पहुंचा।
MHADA नियमों से बचने का आरोप
अनिल परब ने सदन में दावा किया कि वर्ष 1981 के परिपत्र की अनदेखी करते हुए बड़ी जमीनों को जानबूझकर 4,000 वर्ग मीटर से छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित किया गया। उनके अनुसार ऐसा इसलिए किया गया ताकि म्हाडा के आरक्षण और विकास संबंधी कड़े प्रावधानों से बचा जा सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण 20 प्रतिशत म्हाडा आरक्षित कोटा, 10 प्रतिशत ओपन स्पेस और 5 प्रतिशत सार्वजनिक सुविधा क्षेत्र के नियमों का पालन नहीं किया गया, जिससे सरकार और आम जनता को नुकसान हुआ।
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बिल्डर का उदाहरण भी रखा
बहस के दौरान अनिल परब ने एक बिल्डर का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि संबंधित परियोजना में नासिक म्हाडा को दिए जाने वाले 164 फ्लैट उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
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सरकार ने दी कार्रवाई की जानकारी
उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि कथित अवैध भूखंड उप-विभाजन और म्हाडा घोटाला नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में अब तक 49 लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। सरकार ने संकेत दिया कि जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
