सरकार डूबी तो चलेगा लेकिन…, अजित पवार का बड़ा ऐलान, बोले- कर्जमाफी के लिए सही समय का इंतजार
Wardha News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने वर्धा में अपने दौरे के दौरान किसानों और कार्यकर्ताओं को खास संदेश दिया। साथ ही शराबबंदी को लेकर अजित पवार ने बड़ा ऐलान किया।
- Written By: प्रिया जैस
अजित पवार (सौजन्य-एक्स)
Ajit Pawar in Wardha: वर्धा जिला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, आचार्य विनोबा भावे की कर्मभूमि होने के कारण शराबबंदी की गई है। शराबबंदी को लेकर अनेक मत प्रवाह है। मात्र सरकार का राजस्व डूबा तो भी चलेगा लेकिन जिले से शराबबंदी नहीं हटेगी, यह बात उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने पत्र परिषद में कही। किसान कर्ज माफी पर उन्होंने उचित समय पर किसानों को माफी देने की अपनी भूमिका फिर दोहरायी।
जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित पत्र परिषद में विधायक समीर कुणावार, राजेश बकाने, संजय खोडके, हिंगनघाट कृषि उत्पन्न बाजार समिति के सभापति एड. सुधीर कोठारी, जिलाधिकारी वान्मथी सी., पुलिस अधीक्षक अनुराग जैन, जिला परिषद के सीईओ पराग सोमन आदि उपस्थित थे।
बकाया राशि कराई उपलब्ध
उपमुख्यमंत्री ने बताया की सेवाग्राम विकास प्रारूप 2016 में बनाया गया। मात्र प्रारूप में अनेक कामों का समावेश करने की मांग जनप्रतिनिधियों ने की है। साथ ही निर्धारित कामों की लागत बढ़ने के कारण नये से प्रशासकीय मंजूरी देने के संदर्भ में शिखर समिति में प्रस्ताव रखा जाएगा। लोक निर्माण द्वारा किये गये कार्य की बकाया राशि देने के लिए 7500 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है।
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शेष राशि भी जल्द उपलब्ध कराई जाएगी। सोलर कृषि पंप को किसानों को कम प्रतिसाद मिल रहा है। इसके पीछे के कारण को अध्ययन कर अधिक अश्वशक्ति के सोलर पंप देने के संदर्भ में कार्रवाई की जा रही है।
आपदा पीड़ित किसानों दी जाएगी सहायता
बारिश के कारण फसलों का भारी नुकसान हुआ है। नुकसानग्रस्त किसानों सरकार द्वारा सहायता दी जाएगी। मई माह में हुई बारिश के संतरा, मौसंबी का नुकसान हुआ है। उन्हें भी सहायता देने की बात अजित पवार ने कहीं। आने वाले स्थानीय निकाय संस्था के चुनाव साथ में लड़े जाएंगे। जिसका निर्णय स्थानीय स्तर पर होगा, यह भी उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने स्पष्ट किया।
सांसद पहले अपने अधिकार देखे, फिर बोले
सांसद अमर काले ने हाल ही में जिला नियोजन समिति के निधि आवंटन को लेकर पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर पर भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए उनके कहने के अनुसार एक भी काम को मंजूरी नहीं देने की बात कही थी। पालकमंत्री ने निधि नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इस पर उपमुख्यमंत्री पवार से सवाल पूछने पर उन्होंने कहा की, सांसद को पहले अपने अधिकार देखने चाहिए।
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उन्होंने कहा जिला नियोजन समिति राज्य की है। जिसमें पालकमंत्री, स्थानीय विधायक, स्थानीय निकाय संस्था के प्रतिनिधि सदस्य होते है। उनकी मांग के अनुसार निधि दिया जाता है। केंद्र सरकार के इसमें कोई रोल नहीं होता है। सांसद के अंतर्गत जो समिति केंद्र की आती है। उसके निर्णय लेने का उन्हें अधिकार है। परंतु जिला नियोजन समिति में उनका कोई अधिकार नहीं है। फिर भी सांसद आरोप लगा रहें जिस पर पवार ने आश्चर्य व्यक्त किया। इसी के साथ पवार ने नियोजन विभाग द्वारा विकास कामों के लिए सुचारु तरीके से निधि वितरण कार्य की सराहना भी की।
