शरद पवार गुट से हाथ मिलाने पर अजित पवार ने तोड़ी चुप्पी, गठबंधन की असली वजह का किया खुलासा
Ajit Pawar Sharad Pawar Alliance: शरद पवार गुट से गठबंधन पर अजित पवार की दो टूक। 15 जनवरी के चुनावों के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की प्रबल संभावना।
- Written By: प्रिया जैस
शरद पवार और अजित पवार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Pune Municipal Corporation Elections: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन, भविष्य की राजनीति और चल रही अटकलों पर अपनी बात रखी है। आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि यह गठबंधन पूरी तरह व्यावहारिक सोच के तहत किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य वोटों के बंटवारे को रोकना है।
एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अजित पवार ने कहा, “इसमें गलत क्या है? हमारा मकसद वोटों का विभाजन रोकना था, इसलिए हमने गठबंधन किया। स्थानीय स्तर पर हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं की भी यही भावना थी कि अगर गठबंधन किया जाए तो बेहतर नतीजे आ सकते हैं।”
शरद पवार गुट से गठबंधन को लेकर क्या बोले अजित पवार?
भविष्य में एनसीपी (शरद पवार गुट) के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अजित पवार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान मौजूदा चुनावों पर है। उन्होंने कहा, “इस समय हमारी प्राथमिकता सिर्फ वर्तमान चुनाव हैं। इन चुनावों में सकारात्मक परिणाम लाने के लिए हम पूरी ताकत लगा रहे हैं। यही अभी हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है।”
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एनसीपी (शरद पवार गुट) और एनसीपी (अजित पवार) के विलय को लेकर चल रही अटकलों पर भी उपमुख्यमंत्री ने विराम लगाया। उन्होंने कहा, “हमने इस बारे में अभी कोई विचार नहीं किया है। पहले चुनाव हैं, उसके बाद देखा जाएगा।”
जब उनसे शरद पवार और सुप्रिया सुले से बातचीत को लेकर सवाल किया गया, तो अजित पवार ने साफ शब्दों में कहा कि उनकी उनसे कोई बातचीत नहीं हुई है। परिवार और आपसी संबंधों पर बोलते हुए अजित पवार ने कहा कि वे सभी एक ही परिवार का हिस्सा हैं।
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ठाकरे बंधुओं के गठबंधन से क्या फायदा होगा?
उन्होंने कहा, “हम एक परिवार हैं। साथ बैठते हैं, साथ उठते हैं, खुशी और दुख में एक-दूसरे के साथ रहते हैं। क्या हर परिवार में ऐसा नहीं होता? अगर परिवार सुख-दुख में साथ खड़ा रहता है, तो इसमें गलत क्या है?”
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के संभावित गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए अजित पवार ने कहा कि दोनों दलों की कोशिशें चल रही हैं। अब तक दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ते थे और उनके वोटर भी अलग थे। अगर वे साथ आते हैं तो वोटों का बंटवारा नहीं होगा, जिससे उन्हें फायदा होगा। यह बात सही है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
