किसानों के डर से हिलेगी सरकार? दिल्ली के खिलाफ महाराष्ट्र से आंदोलन, गांधी के गढ़ से टिकैत की हुंकार
Wardha News: किसान नेता राकेश टिकैत बुधवार को वर्धा में थे। यहां उन्होंने महाराष्ट्र में हो रही किसान आत्महत्याओं का मुद्दा उठाया और आंदोलन खड़ा करने की बात कही।
- Written By: आकाश मसने
राकेश टिकैत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Rakesh Tikait Vidarbha Tour: विदर्भ, जो कि महाराष्ट्र का एक प्रमुख कृषि क्षेत्र है, वहां किसानों की आत्महत्या की संख्या सबसे अधिक है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि यहां के किसान संगठन कमजोर हैं और किसान आपस में बंटे हुए हैं।
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बुधवार, 17 सितंबर को वर्धा के सेवाग्राम आश्रम परिसर में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में एक सशक्त किसान आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जो सभी किसान संगठनों की अगुवाई में होगा।
किसान नेता टिकैत ने आगे कहा कि आप जिसे भी उचित समझें, उसे वोट दें, लेकिन अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट हुए बिना कोई विकल्प नहीं है। दिल्ली की नीति, जो कृषि उपज के दाम तय करती है, वह बेईमान है।
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तीन दिवसीय विदर्भ दौरे पर किसान नेता
देशभर के विभिन्न किसान संगठनों के 25 से 30 बड़े नेता तीन दिन के दौरे पर विदर्भ पहुंचे हैं ताकि वे यहां के कपास उत्पादक किसानों की समस्याओं को समझ सकें। दौरे की शुरुआत महात्मा गांधी को बापूकुटी में श्रद्धांजलि देकर की गई। इन नेताओं ने नागपुर में आत्महत्या करने वाले किसान शरद राऊत के परिजनों से मुलाकात भी की।
भाजपा सरकार पर हमला करते हुए टिकैत ने कहा कि हमें किसानों की जमीनें बचानी होंगी। सरकार राज्यों में किसानों की जमीनें कॉरपोरेट्स को सौंपने में लगी है। विदर्भ में कपास किसानों, पत्रकारों और अन्य कार्यकर्ताओं से बात कर एक रिपोर्ट बनाई जाएगी, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा को सौंपा जाएगा। उसी आधार पर आंदोलन की आगे की दिशा तय होगी।
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टिकैत ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के किसानों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के किसानों में आत्मबल है, वे अपने हक के लिए लड़ते हैं। लेकिन महाराष्ट्र में किसानों की हालत खराब है। इसलिए यहां एक मजबूत किसान आंदोलन की जरूरत है।
देश केवल आंदोलन से ही बचेगा
देश की सत्ता आज कुछ बड़े घरानों के हाथों में है। सरकार और राजनीतिक पार्टियां धर्म, जाति और भाषा के नाम पर लोगों को उलझाकर उद्योगपतियों के हित साध रही हैं। बाजार समितियों को खत्म करने की साजिश चल रही है। आरएसएस से जुड़े लोगों को जमीनें लीज पर देने की कोशिश की जा रही है। यह देश केवल आंदोलन से ही बचेगा।
जो खेती करता है, वही सच्चा किसान नेता है
जब टिकैत से पूछा गया कि महाराष्ट्र में किसान आंदोलन कमजोर क्यों है, तो उन्होंने कहा कि एक समय था जब महाराष्ट्र में किसान नेताओं के बड़े नाम हुआ करते थे। एक बार हमारे क्षेत्र में एक बड़े किसान नेता आए और उन्होंने कहा कि अगर गाय 10 लीटर दूध देती है और उसका बछड़ा 2 लीटर पी जाता है, तो किसान का 2 लीटर नुकसान होता है। ऐसे लोग किसान नेता नहीं, व्यापारी होते हैं। जो खुद खेती करता है, वही असली किसान और वही किसान नेता होता है।
