विधायक केचे के समर्थकों की अनदेखी, BJP की तहसील कार्यकारिणी पर उठे सवाल
Wardha News: भाजपा की तहसील कार्यकारिणी घोषित होने के बाद दादाराव केचे समर्थकों ने कारंजा-घाडगे में अनदेखी का आरोप लगाया। सभी वर्गों को न्याय देने का दावा अब विवादों में घिर गया है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Wardha Politics Update: पिछले दिनों भाजपा की तहसील स्तर पर जम्बो कार्यकारिणी घोषित की गई। दावा किया गया था कि सभी तबको के कार्यकर्ताओं को उचित न्याय दिलाने का प्रयास हुआ है। लेकिन अब धीरे-धीरे कार्यकर्ताओं का रोष सामने आने लगा है। क्षेत्र के पूर्व विधायक तथा वर्तमान विधान परिषद के सदस्य दादाराव केचे के समर्थकों द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि उनपर कारंजा-घाडगे तहसील कार्यकारिणी में अन्याय करते हुए अनदेखी की गई है।
इस संदर्भ में भाजपा कार्यकर्ता खुलकर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं है। किन्तु दबी आवाज में कार्यकर्ता अपने मन की बात बोल कर दिखा रहे है। प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी का प्रमुख आधार स्तंभ होता है़ अगर कार्यकर्ता नहीं तो पार्टी नहीं। पार्टी के लिए नेता जितना महत्वपूर्ण होता हैं, उतना ही कार्यकर्ता महत्व रखता है।
तहसील के इस जम्बो कार्यकारणी में कई सालों से दादाराव केचे के कंधे से कंधा मिलाकर पार्टी को मजबूत करने वाले इमानदार कार्यकर्ता पर अन्याय किये जाने की बात सामने आ रही है।
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पुराने कार्यकर्ताओं साइड लाइन करने का आरोप
कार्यकर्ता इस बात से दु:खी हैं कि जब पार्टी का झंडा उठाने वाले गिने चुने ही कार्यकर्ता थे तब उन्होंने विधान परिषद सदस्य दादाराव केचे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। जब पार्टी का जनाधार बढ़ा तथा सामान्य कार्यकर्ताओं की मेहनत से पार्टी सत्ता में आई तो, पुराने कार्यकर्ताओं को साइड लाइन कर दूसरे पार्टी से सत्ता की मलाई खाने को आये नए कार्यकर्ता पार्टी के लिए खास हो गए है।
इससे यह बात साफ हो गई है कि विधायक केचे व विधायक वानखेड़े के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। परिणामवश दोनों के कार्यकर्ताओं में तनातनी बनी हुई है।
स्थानीय ईकाई के चुनाव पर नजर
आगामी दिनों में जिला परिषद, पंचायत समिती, नगर परिषद के चुनाव होने वाले हैं। जब की 40 वर्ष से पार्टी के लिए काम करने वाले पार्टी कार्यकर्ता पर अन्याय होने की बात कार्यकर्ता दबी आवाज में बोल रहे है। उन्हें यह भी डर है कि आने वाले दिसंबर, जनवरी में स्थानीय इकाई चुनाव में भी उनपर इसी तरह का अन्याय किया जा सकता है। ऐसे में नाराज पार्टी कार्यकर्ता क्या रुख अपनाते हैं, यह देखने वाली बात है।
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शहर अध्यक्ष नियुक्ति पर मचा बवाल
तहसील कार्यकारीणी घोषित होने के बाद से शहर अध्यक्ष पद पर मतभेद बने हुए है़ इस पद पर अब तक नियुक्ति नहीं हो पा रही है। इस मुद्दे पर भाजपा यहां दो गुटों में बट गई है। दोनों गुट शहर अध्यक्ष पद के लिए दावा कर रहे है। परिणामवश शहर अध्यक्ष को लेकर बवाल मचा हुआ है।
हर बार तेली समाज के कार्यकर्ता को अध्यक्ष नियुक्त किया जाता रहा है। किन्तु इस बार इस पद पर किसी अन्य समाज का प्रतिनिधि नियुक्त करने की मांग है। विशेष कर माली समाज को यह पद दिये जाने पर जोर है। भाजपा हाईकमान भी इस बात पर सहमत होने की बात भाजपा में कही जा रही है। किन्तु स्थानीय एक तबका इस बात पर सहमत नजर नहीं आने की बात कही जा रही है। इस नियुक्ति पर सभी की नजरें टिकी है।
