शरद पवार कभी इधर जाते हैं, कभी उधर, परिसीमन बिल पर सुप्रिया सुले के बयान से भड़की कांग्रेस
Congress Slams Sharad Pawar Delimitation Bill: परिसीमन बिल पर एनसीपी (SP) के रुख और सुप्रिया सुले के बयान को लेकर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
- Written By: अनिल सिंह
शरद पवार, सुप्रिया सुले और राशिद अल्वी (फोटो क्रेडिट-X)
Congress On Supriya Sule Delimitation Bill: महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास अघाड़ी के भीतर एक बार फिर वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस बार विवाद का केंद्र बना है केंद्र सरकार का आगामी परिसीमन बिल। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले द्वारा इस बेहद संवेदनशील बिल पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सशर्त समर्थन देने के मिले संकेतों के बाद कांग्रेस आलाकमान पूरी तरह भड़क गया है।
सुप्रिया सुले ने एक बड़ा सियासी इशारा करते हुए कहा था कि यदि परिसीमन बिल के तहत 50 फीसदी सीटें आरक्षित रखी जाती हैं, तो उनकी पार्टी को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने यह शर्त भी जोड़ी कि परिसीमन का आधार केवल जनसंख्या को न बनाया जाए। सुले का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक गलियारों में शरद पवार के दोबारा पाला बदलने की अटकलें काफी तेज हैं।
शरद पवार को अपनी पिक्चर साफ करनी चाहिए
सुप्रिया सुले के इस रुख पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राशिद अल्वी ने बेहद तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। अल्वी ने शरद पवार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा, “हम सभी शरद पवार जी की बहुत इज्जत करते हैं, वे देश के बेहद कद्दावर और बड़े नेता हैं। लेकिन मैं इस बात को बार-बार दोहरा चुका हूँ कि शरद पवार को अब अपनी राजनीतिक स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट करनी चाहिए। मीडिया और राजनीतिक हलकों में कभी चर्चा चलती है कि वे कांग्रेस के साथ आ रहे हैं, तो कभी खबर आती है कि वे विपक्ष को छोड़कर सत्तापक्ष के साथ जा रहे हैं। यह दोहरा रुख भ्रम पैदा करता है।”
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बिल पास हुआ तो भारत के इतिहास का सबसे खराब दिन होगा
बीजेपी की रणनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी आगामी सत्र में परिसीमन बिल और महिला आरक्षण का मुद्दा जानबूझकर लेकर आ रही है। उन्होंने दावा किया कि इस कानून को पास कराने के लिए बीजेपी सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों और भारी मात्रा में धनबल का इस्तेमाल कर सकती है।
विपक्ष को आगाह करते हुए राशिद अल्वी ने कहा, “बीजेपी का प्रयास रहेगा कि वे विपक्षी सांसदों पर दबाव बनाकर उन्हें संसद से वॉकआउट करने पर मजबूर कर दें, ताकि इस कानून को आसानी से पास कराकर वे अपनी मर्जी के मुताबिक देश की तमाम चुनावी क्षेत्रों (कॉन्सिट्यूएंसी) का नए सिरे से निर्धारण कर सकें। मेरा साफ मानना है कि अगर यह कानून संसद के भीतर पास हो जाता है, तो वह दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे खराब दिन होगा और उसी दिन देश का लोकतंत्र हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।”
क्या है परिसीमन बिल और क्यों मचा है बवाल?
दरअसल, देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए लोकसभा की सीटों की संख्या और उनके भौगोलिक क्षेत्रों के पुनर्गठन की तैयारी चल रही है। इस नए परिसीमन बिल के माध्यम से संसद में सीटों की अधिकतम संख्या को बढ़ाकर 850 करने की योजना बनाई जा रही है। वर्तमान में मांग यह भी उठ रही है कि मौजूदा सीटों की संख्या को सीधे दोगुना कर दिया जाए।
इस बिल का सबसे बड़ा विवाद यह है कि यदि नए सिरे से सीटों का निर्धारण विशुद्ध रूप से जनसंख्या के अनुपात में किया गया, तो उत्तर भारत के राज्यों में लोकसभा सीटें काफी बढ़ जाएंगी, जबकि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम करने वाले दक्षिण भारत के राज्यों को भारी राजनीतिक नुकसान होने की आशंका है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर विपक्ष पूरी तरह एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा था, लेकिन शरद पवार गुट के बदले सुरों ने विपक्षी एकता की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
