वर्धा में गर्मी की छुट्टियों का असर, 715 स्कूल बस फेरियां बंद होने से ST की आय घटी
MSRTC ST Bus : वर्धा जिले में स्कूलों और कॉलेजों की छुट्टियां शुरू होने से एसटी महामंडल की 715 स्कूल बस फेरियां अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। इससे महामंडल के राजस्व पर भारी असर पड़ा है।
- Written By: केतकी मोडक
एसटी बस (सोर्स: सोशल मीडिया)
MSRTC ST Bus Revenue Loss In Wardha: महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल की रीढ़ मानी जाने वाली ‘लाल परी’ को इस समय वर्धा जिले में दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। वर्धा जिले के तमाम स्कूलों और महाविद्यालयों में गर्मी की आधिकारिक छुट्टियां शुरू होने के बाद विद्यार्थियों के लिए चलने वाली विशेष बस सेवाओं पर इसका बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
छात्र-छात्राओं की आवाजाही में आई अचानक भारी कमी की वजह से जिले के पांचों प्रमुख डिपो से संचालित होने वाली कुल 715 स्कूल बस फेरियों को अस्थायी रूप से ब्रेक लगा दिया गया है। ऐन शादी-ब्याह और छुट्टियों के सीजन में इतनी बड़ी संख्या में फेरियां बंद होने से एसटी महामंडल के दैनिक राजस्व और आय पर भारी चोट पहुंची है।
240 बसों का बेड़ा
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्धा, आर्वी, हिंगनघाट, पुलगांव और तलेगांव (श्यामजीपंत) इन पांचों डिपो के माध्यम से पूरे वर्धा जिले में रोजाना सघन यात्री परिवहन सेवा का संचालन किया जाता है। इन सभी डिपो को मिलाकर वर्तमान में कुल 240 बसों का बड़ा बेड़ा उपलब्ध है। सामान्य शिक्षण दिनों में इन बसों के जरिए प्रतिदिन लगभग 1,336 बस फेरियां सुचारू रूप से चलाई जाती हैं।
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इनमें से आधी से ज्यादा बस फेरियां विशेष तौर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं के आवागमन के समय को ध्यान में रखकर शेड्यूल की जाती हैं। लेकिन अब छुट्टियां होने से यह यात्री संख्या न के बराबर रह गई है।
एसटी की कमाई का मुख्य जरिया है शैक्षणिक परिवहन
परिवहन महामंडल के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान विद्यार्थियों का परिवहन एसटी की आय का सबसे भरोसेमंद और महत्वपूर्ण स्रोत होता है। जिले के सुदूर ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी केंद्रों तक हजारों छात्र रियायती पास और नियमित टिकटों के जरिए हर दिन एसटी बसों से ही सफर करते हैं।
छुट्टियों के दौरान यह बंधी-बंधाई नियमित आय पूरी तरह से ठप हो जाती है, जिससे डिपो के दैनिक खर्चे निकालने और उनके वित्तीय राजस्व को संतुलित रखने में भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
बसों की टूट-फूट से बढ़ी परेशानी
राजस्व में कमी के साथ-साथ जिले के कई ग्रामीण मार्गों की बदहाल और जर्जर स्थिति भी एसटी प्रशासन के लिए इस वक्त सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है। अनेक प्रमुख और लिंक रोड्स पर बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं, जिससे कई दूरदराज के गांवों तक नियमित यात्री बस सेवा पहुंचाना बेहद जोखिम भरा और कठिन साबित हो रहा है।
इन उबड़-खाबड़ और खराब सड़कों के कारण बसों की टूट-फूट (मैकेनिक डैमेज) काफी बढ़ गई है, जिससे डिपो में बसों के मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और साथ ही बसों की समय-सारिणी (टाइम टेबल) के पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका भी लगातार बनी रहती है।
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नया सत्र शुरू होते ही चरणबद्ध तरीके से बहाल होंगी बस सेवाएं
वर्धा के विभागीय नियंत्रक भगवान जगनौर ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्कूल एवं महाविद्यालयों की लंबी छुट्टियों के कारण ही एहतियातन 715 स्कूल बस फेरियां बंद रखने का फैसला लिया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में जरूरत के आधार पर जिले के पांचों डिपो से हर दिन लगभग 1,116 बस फेरियां सुचारू रूप से चलाई जा रही हैं ताकि आम यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
भगवान जगनौर ने आश्वासन दिया कि जैसे ही जून महीने में नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा, बंद की गई सभी स्कूल बस सेवाओं को चरणबद्ध (स्टेप-बाय-स्टेप) तरीके से दोबारा बहाल कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि मानसून से पहले संबंधित विभाग द्वारा ग्रामीण सड़कों की समय पर मरम्मत कर दी जाएगी, जिससे आने वाले दिनों में यात्रियों को अधिक सुरक्षित, सुगम और आरामदायक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी।
