भंडारा में प्लास्टिक पर कार्रवाई सुस्त, 5 महीनों में सिर्फ 3 मामलों पर जुर्माना

Plastic Ban: भंडारा शहर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बावजूद इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल जारी है। नगर परिषद द्वारा पिछले 5 महीनों में केवल 3 मामूली कार्रवाइयां किए गए हैं।
Bhandara Nagar Parishad Single Use Plastic Ban
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Parishad Single Use Plastic Ban In Bhandara: सिंगल यूज प्लास्टिक और पतली पॉलिथीन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद भंडारा शहर में इसका बढ़ता उपयोग पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर संकट बना हुआ है। नियमों में सख्ती की कमी और विकल्पों की अनुपलब्धता के कारण यह समस्या लगातार विकराल रूप ले रही है।

चौंकाने वाली बात यह है कि भंडारा नगर परिषद ने वर्ष 2026 (जनवरी-मई) के पिछले 5 महीनों में केवल 3 कार्रवाइयां की हैं, जिनमें 3 व्यापारियों से मात्र 11 हजार रुपये की प्लास्टिक जब्त की गई है। यह मामूली कार्रवाई भी फरवरी-मार्च महीने के दौरान की गई, इसके बाद नगर परिषद ने कार्रवाई करने की जहमत तक नहीं उठाई।

सतर्क हो गए व्यापारी

इस बारे में कहा जा रहा है कि व्यापारी सतर्क हो गए हैं, इसलिए प्रशासन ने अपनी कार्रवाई रोक दी है। भंडारा शहर में इन दिनों बेरोकटोक प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। स्थिति यह है कि नगर परिषद कार्यालय के ठीक सामने और पीछे के हिस्से में दुकानदार खुलेआम प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन यह प्रशासनिक अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रहा है। केवल कुछ ही व्यापारियों पर कार्रवाई होने से दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं।

केवल दिखावे के लिए यदा-कदा कार्रवाई की जाती है, जिसका जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं पड़ रहा है। प्लास्टिक के लगातार बढ़ते चलन के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। पहला यह कि प्लास्टिक बैग और डिस्पोजेबल उत्पाद बहुत सस्ते और सुविधाजनक हैं, जिससे लोग आसानी से इसकी ओर आकर्षित होते हैं। दूसरा, प्रशासन की ओर से निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और बड़े गोदामों पर कोई ठोस कानूनी प्रहार नहीं किया जा रहा है।

इसके अलावा, कपड़े, जूट या पेपर बैग काफी महंगे पड़ते हैं। आम जनता में भी अभी तक खरीदारी के समय घर से थैला लेकर निकलने की आदत विकसित नहीं हो पाई है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है जानलेवा असर

सिंगल यूज प्लास्टिक को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं। यह न केवल मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर रहा है, बल्कि बारिश के दौरान नालियों को जाम कर जलजमाव की गंभीर समस्या पैदा करता है। जब इस प्लास्टिक कचरे को जलाया जाता है, तो इससे कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी अत्यंत विषैली गैसे निकलती है, जी वायु प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ सांस संबंधी गंभीर बीमारियां पैदा करती है। लावारिस घूमने वाले आवारा पशु भोजन के लालच में इन प्लास्टिक थैलियों को खा लेते हैं, जिससे पेट में रुकावट और दम घुटने के कारण उनकी मौत हो जाती है।

शीघ्र होगी कार्रवाई

नय भंडारा स्वास्थ्य निरीक्षक प्रशांत मेश्राम ने कहा है कि "नगर परिषद की और से फरवरी-मार्च में कार्रवाई की गई थी। इसके बाद व्यापारी सतर्क हो गए जिसकी वजह से कार्रवाई रोक दी गई। फिलहाल बारिश पूर्व नाला सफाई अभियान चल रहा है। यह अभियान समाप्त होने के बाद पुनः प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्ती की कार्रवाई शुरू की जाएगी।"

सप्लाई चेन को तोड़ने की सख्त जरूरत

  • इस प्रतिबंध को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए केवल इस्तेमाल पर रोक लगाना काफी नहीं है, बल्कि प्लास्टिक की बैलियां बनाने वाली फैट्रियों के उत्पादन पर ताला लगाना होगा।
  • थोक विक्रेताओं, आपूर्तिकर्ताओं और निर्माताओं की पूरी सप्लाई चेन को तोड़ना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही, सरकार को जूट और कपड़े के बैलों के निर्माण पर सब्सिडी देनी चाहिए ताकि ये आम जनता को किफायती दामी पर मिल सके।
  • नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए खरीदारी के लिए हमेशा अपने व्यक्तिगत शैले का उपयोग करना चाहिए और दुकानदारों से प्लास्टिक बैग न लेने का संकल्प लेना चाहिए।
  • इत्त विकराल समस्या से निपटने के लिए सरकारी सख्ती और जनता की जागरूकता दोनों का एक साथ होना अनिवार्य है।
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