तिरोड़ा में जल संकट गहराया, पाइपलाइन के आकार से बढ़ी समस्या, 40 साल पुरानी योजना के बाद भी पानी की किल्लत
Wainganga River Water Supply: महाराष्ट्र के तिरोड़ा शहर में जलापूर्ति योजना में पाइपलाइन के आकार और ढांचागत खामियों के कारण पानी की समस्या गंभीर हो गई है।
Water Supply (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Tiroda Water Crisis: तिरोड़ा शहर के लिए जलापूर्ति विभाग द्वारा पीने के पानी के लिए वर्ष 1985 में योजना शुरू की गई थी। यह योजना वैनगंगा नदी पर कवलेवाड़ा नदीघाट पर पानी की टंकी व पंप लगाकर बनाई गई थी। यहां से पाइप लाइन के द्वारा एमएसईबी विभाग के पास कवलेवाड़ा रास्ते पर नहर के करीब टंकी बनाकर यहां की टंकी में पानी भरा जाता था।
इस टंकी के पानी से शहर में बिछाई गई पाइपलाइन के द्वारा शहरवासियों के घरों के कनेक्शन में जलापूर्ति की जाती थी। योजना 40 वर्ष तक चली, बगैर किसी चिल्हाहट या हाहाकार के शहर में पुरानी वसाहत व नई वसाहत में बहुत बड़ी जनसंख्या बढ़कर परिसर भी बढ़ गया, तब नई कॉलोनी बनी, जिसमें पाइपलाइन नहीं डाली गई थी व केवल एक टंकी होने से कुछ समस्याएं उत्पन्न होती थी, लेकिन समस्याओं ने विकराल रुप धारण नहीं किया।
धापेवाड़ा प्रकल्प
जिले भर में इस योजना की तारीफे होती रही। जब यह योजना बनी तब वैनगंगा नदी पर धापेवाड़ा प्रकल्प के तहत नदी के प्रवाह को रोका नहीं गया था। बहता हुआ पानी नदी में था। रानी अवंतीबाई वार्ड को जाने वाली पाइपलाइन 3 किमी। लंबाई से गई है व यह वार्ड की रचना शहर से ढलान भाग में रहने की वजह से पाइपों में पानी भरा ही रहता है।
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वार्ड का परिसर लंबाई में दोनों बाजू में ढलान व बीच हिस्से में टेक भाग है। जिससे इस टेपर भाग के नल कनेक्शन धारकों के नलों में पानी ही नहीं रहता। जलापूर्ति शुरू हुई कि दोनों तरफ के ढलान भाग में पानी चला जाता है। जब जलापूर्ति योजना शुरू हई थी तब 7 इंची वाले पाइप डाले थे व नगर परिषद ने नई योजना बनाई तब उन्होंने 3 इंची वाले पाइप डाले। इन कारणों से इस वार्ड में पानी की भारी किल्लत उत्पन्न हो गई है।
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पानी को पूर्णत रोका गया
जब तक 7 इंची वाले पाइप नहीं डालते तब तक इस वार्ड में पीने के पानी की समस्या दूर नहीं होगी। इस ज्वलंत समस्या को सुलझाने नप ध्यान दे, ऐसी मांग वार्डवासियों ने की है। नदी पर धापेवाड़ा उपसा का बांध वैनगंगा नदी पर धापेवाड़ा उपसा सिंचाई विभाग का बांध बनाकर बहते पानी को पूर्णत रोका गया व इस रोके हुए पानी के निचले हिस्से में जलापूर्ति विभाग की शहरवासियों के लिए पीने के पानी की योजना का पंप है।
बांध बनाने से पूर्ण पानी रोक लिया गया, जब एक गेट खोला जाता है व पानी कम मात्रा में नीचे बहता है तब जलापूर्ति विभाग के पंपों तक पहुंचता है। पानी की समस्या केवल गर्मी के दिनों में ही उत्पन्न होती है। 2025 से नप में योजना नए सिरे सेनगर परिषद ने नई योजना वर्ष 2025 में बनाई। नई 3 टंकियों में पुरानी टंकी के पास, आंबेडकर शाला के पास व शहीद स्मारक के पास बनाई गई व नए सिरे से शहर में पाइप लाइन डाली गई। लेकिन 40 वर्ष पुर्व जलापूर्ति विभाग ने बड़े आकार के पाइप डाले थे। उसकी तुलना में इन्होंने छोटे साइज के पाइप डाले है।
