तीसरी मुंबई परियोजना पर बढ़ा विवाद, स्थानीय लोगों ने सीएम फडणवीस से की जांच की मांग
Third Mumbai Project News: पनवेल, उरण और पेण में प्रस्तावित तीसरी मुंबई परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय लोगों ने कानूनी उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
तीसरी मुंबई प्रोजेक्ट विवाद (सौ. सोशल मीडिया )
Third Mumbai Project Controversy: पनवेल, उरण और पेण तालुका में प्रस्तावित तीसरी मुंबई की परियोजना को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बारे में स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से संपर्क किया है और गंभीर आरोप लगाया है कि इस परियोजना में कानूनी नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन, पुनर्वास में गलतियां और प्रशासनिक स्तर पर बड़ी गड़बड़ियां हो रही हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस परियोजना को लागू करते समय ‘जमीन अधिग्रहण, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट 2013’, ‘एनवायरनमेंटल प्रोटेक्शन एक्ट 1986’ और ‘एमआरटीपी’ एक्ट के जरूरी नियमों का पालन नहीं किया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि प्रोजेक्ट के लिए जरूरी पब्लिक हियरिंग, सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट और एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस प्रोसेस को ट्रांसपेरेंट तरीके से लागू नहीं किया गया है। सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत पाटिल ने यह भी बताया गया है कि पर्यावरण के लिए सबसे बड़ा खतरा यह प्रोजेक्ट है।
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शहर में भविष्य में आ सकती है प्राकृतिक आपदा
प्रोजेक्ट एरिया में बड़ी मात्रा में नमक की दलदली जमीन हैं, और ये जमीनें सीआरजेड 1बी एरिया में आती हैं। नमक की दलदली जमीन को बाढ़ से बचाने वाली एक नेचुरल दीवार माना जाता है, इसलिए, यह डर है कि यहां कंस्ट्रक्शन से भविष्य में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आ सकती है।
मैंग्रोव और पानी के रिसोर्स के नष्ट होने की भी संभावना है, जिससे बायोडायवर्सिटी को बहुत ज्यादा नुकसान होगा। प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों, मछुआरों, नमक की दलदली जमीन पर काम करने वाले मजदूरों, आदिवासियों और 12 बकाएदारों के लिए कोई पूरी रिहैबिलिटेशन पॉलिसी घोषित नहीं की गई है। शिकायत करने वाले ने कहा है कि नवी मुंबई एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की तर्ज पर 22.5 परसेंट डेवलप्ड जमीन का प्रपोजल मार्केट वैल्यू के मुकाबले बहुत कम और गलत है।
अधिकारियों-राजनीतिक संस्थाओं पर संदेह
- शिकायत में सरकारी अधिकारियों और कुछ पॉलिटिकल संस्थाओं के अपने फायदों पर भी शक जताया गया है, जिसके बारे में दावा किया गया है कि यह महाराष्ट्र लोकायुक्त एक्ट के अनुसार कुप्रबंधन की कैटेगरी में आता है।
- खास बात यह है कि यह भी साफ किया गया है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए पानी की सप्लाई, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और सीवेज डिस्पोजल का कोई पक्का इंतजाम नहीं है।
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लोगों की मुख्य मांगें
लोकायुक्त ऑफिस के जरिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, प्रोजेक्ट को तुरत सस्पेंड किया जाना चाहिए और सभी कानूनी प्रोसेस को फिर से लागू किया जाना चाहिए, कानून के मुताबिक सभी प्रभावित पार्टियों को सही मुआवजा और पुनर्वास पक्का किया जाना चाहिए।
