नेरुल पाइपलाइन टेंडर पर भिड़े भाजपा नगरसेवक, नवी मुंबई मनपा मुख्यालय में गरमाया माहौल
Navi Mumbai Nerul Water Pipeline: नेरुल सेक्टर-10 की पानी पाइपलाइन परियोजना के टेंडर को लेकर भाजपा के दो नगरसेवकों के बीच तीखी बहस हो गई। विवाद के बाद टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे।
- Written By: अपूर्वा नायक
नवी मुंबई महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)
Navi Mumbai Nerul Water Pipeline Tender: मनपा क्षेत्र में विकास कामों के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है, नेरुल सेक्टर 10 में जलापूर्ति विभाग के तहत पानी की पाइपलाइन बिछाने के टेंडर को लेकर मनपा मुख्यालय में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के दो नगरसेवकों के बीच जमकर वाद-विवाद हुआ।
इस घटना से मनपा प्रशासन और राजनीतिक क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। चर्चा की जा रही कि सत्ताधारी पार्टी के नगरसेवक एक-दूसरे का खुलकर विरोध कर रहे हैं।
पता हो कि नेरुल सेक्टर 10 इलाके में भीतरी बस्तियों में पानी की नई पाइप लाइन बिछाने का काम मनपा के जलापूर्ति विभाग ने शुरू किया है। इस काम के लिए टेंडर प्रोसेस दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। मंगलवार को टेंडर खुलने के बाद एक कॉन्ट्रैक्टर को टेक्निकल आधार पर अयोग्य घोषित किए जाने के बाद विवाद शुरू हुआ।
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रविंद्र ने की दोबारा टेंडर निकालने की मांग
वार्ड 24 के नगरसेवक रविंद्र इथापे ने आरोप लगाया कि जिस कॉन्ट्रैक्टर की बात हो रही है, उसे 34 साल का अनुभव होने के बावजूद रिजेक्ट कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रोसेस में कोई पारदर्शिता नहीं थी और दूसरे कॉन्ट्रैक्टर को फायदा पहुंचाया जा रहा था।
उन्होंने यह भी मांग की कि काम के लिए दोबारा टेंडर निकाला जाए। वहीं, वार्ड 23 के कॉर्पोरेटर प्रदीप गवस ने इथापे के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि नियमों के दायरे में जो कॉन्ट्रैक्टर क्वालीफाई करता है, उसे ही काम दिया जाना चाहिए।
वार्ड में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं
उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनके वार्ड में काम में बेवजह दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद दोनों नगरसेवकों के बीच कहासुनी बढ़ गई और माहौल गरमा गया। जब हालात हाथ से निकलने लगे, तो सीनियर अधिकारियों ने बीच-बचाव किया और दोनों पक्षों को शांत करने की कोशिश की।
क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू
इस बीच, गर्मियों में जहां शहर के कई हिस्सों में पानी की सप्लाई की दिक्कतें आ रही है, वहीं पानी की पाइपलाइन के जरूरी काम को लेकर हो रहे इस झगडे से नागरिक भी नाराजगी जता रहे है। संबंधित कॉन्ट्रैक्टर को डिसक्वालीफाई करने के कारणों को लेकर मनपा में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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इस बात पर भी बहस हो रही है कि क्या दोनों भाजपा नगरसेवकों के बीच यह झगड़ा सिर्फ टेंडर प्रोसेस तक ही सीमित है या इसके पीछे लोकल पॉलिटिकल मतभेद हैं। नागरिक उम्मीद जता रहे हैं कि इस झगड़े का असर नेरुल इलाके में पानी सप्लाई सुधार प्रोजेक्ट पर नहीं पड़ना चाहिए।
