Badlapur egg Trafficking Mastermind Sulakshana Gadekar (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Sulakshana Gadekar Mastermind: महाराष्ट्र के बदलापुर में सामने आए अंडाशय (Egg/Ovarian) तस्करी मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस काले कारोबार की मुख्य साजिशकर्ता के रूप में 44 वर्षीय सुलक्षणा गाडेकर का नाम सामने आया है, जिसने गरीबी को अपना हथियार बनाया। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। यह रैकेट केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था, बल्कि कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों तक इसके तार फैले हुए हैं। करीब 300 से अधिक महिलाएं इस गिरोह की शिकार हो चुकी हैं।
सुलक्षणा गाडेकर ने अपने घर को ही एक ‘फर्जी क्लीनिक’ में तब्दील कर दिया था। वह आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को चंद रुपयों का लालच देकर उनके शरीर के साथ खिलवाड़ करती थी। ठाणे पुलिस की तीन टीमें इस समय बड़े अस्पतालों और आईवीएफ (IVF) केंद्रों की भूमिका की जांच कर रही हैं, क्योंकि बिना अनुभवी डॉक्टरों और अत्याधुनिक सुविधाओं के शरीर से अंडाशय निकालना संभव नहीं है।
सुलक्षणा गाडेकर बदलापुर के जोवेली इलाके की ‘नैनो सिटी’ बिल्डिंग में रहती है। वह कोई डॉक्टर या प्रशिक्षित नर्स नहीं है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने घर पर ही महिलाओं को हार्मोनल इंजेक्शन लगाती थी। पुलिस ने उसके घर से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां, सोनोग्राफी रिपोर्ट और नकली हलफनामे बरामद किए हैं। वह एक एजेंट के रूप में काम करती थी जो गरीब बस्तियों से महिलाओं को चुनती थी और उन्हें अंडाशय ‘डोनेट’ करने के नाम पर 20,000 रुपये का लालच देती थी।
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पुलिस जांच के अनुसार, सुलक्षणा और उसके सहयोगी पहले महिलाओं को घर बुलाकर अवैध रूप से इंजेक्शन लगाते थे ताकि उनके अंडाशय में अधिक एग्स बन सकें। इसके बाद बिना किसी डॉक्टर की सलाह के गुप्त रूप से सोनोग्राफी कराई जाती थी। जब एग्स पूरी तरह विकसित हो जाते, तब इन महिलाओं को सांठगांठ वाले आईवीएफ केंद्रों के ऑपरेशन थिएटर में ले जाकर अंडाशय निकाल लिए जाते थे। इन अंडाशयों को फिर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ऊंचे दामों पर बेचा जाता था। इस धंधे में बिचौलियों को प्रति महिला 3,000 रुपये का कमीशन मिलता था।
बदलापुर, ठाणे, विट्ठलवाड़ी और वांगानी में हुई छापेमारी के दौरान बदलापुर पुलिस ने 10 लाख रुपये से अधिक की दवाइयां और इंजेक्शन जब्त किए हैं। सूत्रों का कहना है कि ठाणे के कई प्रतिष्ठित आईवीएफ केंद्रों के डॉक्टर इस सिंडिकेट का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस अब उन फार्मेसियों की तलाश कर रही है जो बिना प्रिस्क्रिप्शन के सुलक्षणा को इन दवाओं की आपूर्ति कर रही थीं। 300 से अधिक पीड़ित महिलाओं की पहचान करना पुलिस के लिए अगली बड़ी चुनौती है, क्योंकि सामाजिक बदनामी के डर से कई महिलाएं सामने आने से कतरा रही हैं।