Newborn Baby Found In Bag Vasai प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
International Women’s Day Vasai Incident: एक ओर जहां पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति और उनके सम्मान का उत्सव मना रहा है, वहीं महाराष्ट्र के वसई से मानवता को शर्मसार करने वाली एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। वसई पूर्व के वसंतनगरी सिग्नल इलाके में शनिवार की सुबह एक लावारिस बैग में 15 से 20 दिन की नवजात बच्ची मिली। मासूम को इस तरह सड़क किनारे लावारिस छोड़ देना समाज की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, लेकिन मानिकपुर पुलिस की तत्परता और एक महिला पुलिसकर्मी की ममता ने इस नन्ही जान को नई जिंदगी दी है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना 8 मार्च 2026 की सुबह करीब 7:50 बजे की है। ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिस सिपाही पल्लवी संजय नरवाडे को सूचना मिली कि वसंतनगरी सिग्नल के पास एक संदिग्ध बैग में बच्चा है। सूचना मिलते ही वे बिना एक पल गंवाए डायल-112 वाहन से मौके पर पहुंचीं। वहां एक वॉशिंग पाउडर के विज्ञापन वाले रंगीन बैग में मासूम बच्ची को ठूंसकर रखा गया था। स्थानीय महिलाओं की मदद से बच्ची को बैग से बाहर निकाला गया और पुलिस ने तुरंत उसे सुरक्षा घेरे में ले लिया।
सिपाही पल्लवी नरवाडे और उनकी टीम ने मौके पर मौजूद लोगों से बच्ची के माता-पिता के बारे में पूछताछ की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। महिला दिवस की सुबह जहां लोग जश्न की तैयारी कर रहे थे, पल्लवी ने कर्तव्य और मातृत्व का परिचय देते हुए बच्ची को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद बताया कि बच्ची की स्थिति फिलहाल स्थिर है। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर बच्ची को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि उसे सुरक्षित आश्रय मिल सके।
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माणिकपुर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का मानना है कि किसी ने जानबूझकर बच्ची की जान जोखिम में डालने के इरादे से उसे वहां छोड़ा था। जांच टीम अब वसंतनगरी सिग्नल और आसपास के रिहायशी इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि उस निर्दयी व्यक्ति की पहचान की जा सके जिसने इस मासूम को लावारिस छोड़ा। साथ ही, स्थानीय अस्पतालों और प्रसूति केंद्रों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
यह घटना उस दिन सामने आई है जब दुनिया ‘बेटी बचाओ‘ का नारा बुलंद कर रही है। वसई की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिकता के दावों के बावजूद बेटियों के प्रति भेदभाव की जड़ें आज भी गहरी हैं। हालांकि, महिला पुलिसकर्मी पल्लवी नरवाडे की सतर्कता ने यह भी साबित कर दिया कि खाकी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है। पुलिस अधिकारियों ने पल्लवी की सराहना करते हुए कहा कि उनकी त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी अनहोनी टल गई और मासूम को समय पर इलाज मिल सका।