राजेंद्र साप्ते (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Rajendra Sapte Protest March Kalwa: ठाणे महानगरपालिका (TMC) चुनाव के लिए मतदान से पहले एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। पूर्व उपमहापौर और शिवसेना के वरिष्ठ नेता राजेंद्र साप्ते ने टिकट न मिलने से नाराज होकर बृहस्पतिवार को एक विशाल विरोध मार्च निकाला। दिवंगत आनंद दिघे के कट्टर समर्थक माने जाने वाले साप्ते ने कलवा क्षेत्र से दिघे के स्मारक ‘आनंद आश्रम’ तक पैदल मार्च कर अपना शक्ति प्रदर्शन किया।
राजेंद्र साप्ते कलवा (वार्ड संख्या 25) से लगातार चार बार पार्षद चुने जा चुके हैं और इस बार भी वह यहीं से दावेदारी कर रहे थे। हालांकि, महायुति (शिवसेना-भाजपा गठबंधन) के बीच हुए सीट बंटवारे में यह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में चली गई। साप्ते का आरोप है कि भाजपा ने “ब्लैकमेलिंग” का सहारा लेकर अंतिम समय में यह सीट हथिया ली, जिससे उनके जैसे निष्ठावान शिवसैनिकों के साथ अन्याय हुआ है।
मार्च के दौरान साप्ते ने भाजपा के स्थानीय नेतृत्व पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “मैंने चार दशकों तक पार्टी और आनंद दिघे साहब की विचारधारा की सेवा की है। भाजपा ने गठबंधन धर्म का पालन करने के बजाय दबाव की राजनीति की। कलवा की जनता जानती है कि यहाँ किसने काम किया है।” साप्ते के इस रुख ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए धर्मसंकट पैदा कर दिया है, क्योंकि ठाणे उनकी प्रतिष्ठा का सवाल है।
ठाणे सहित राज्य के 29 नगर निकायों के लिए 15 जनवरी को मतदान होना है। नामांकन प्रक्रिया 30 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है और आज यानी 2 जनवरी (शुक्रवार) नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है। अगर राजेंद्र साप्ते अपना नामांकन वापस नहीं लेते हैं, तो वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर महायुति के आधिकारिक प्रत्याशी की राह मुश्किल कर सकते हैं।
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15 जनवरी को होगा शक्ति परीक्षण चुनाव आयोग के अनुसार, उम्मीदवारों की अंतिम सूची 3 जनवरी को प्रकाशित की जाएगी। ठाणे नगर निकाय के चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा है। साप्ते जैसी पुरानी और मजबूत कड़ी का टूटना शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए कलवा बेल्ट में बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि शिंदे अपने इस पुराने सिपाही को मनाने में सफल होते हैं या कलवा में बगावत की नई इबारत लिखी जाएगी।