‘नाबालिग की सहमति, सहमति नहीं’, ठाणे की कोर्ट ने दुष्कर्म मामले में दोषी को सुनाई 20 साल की सजा
Thane News: ठाणे की पॉक्सो अदालत ने नाबालिग से बार-बार बलात्कार कर उसे गर्भवती करने के दोषी युवक को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने नाबालिग की सहमति को अमान्य बताया।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Thane POCSO Court Verdict: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए ठाणे की एक विशेष अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 23 वर्षीय युवक को नाबालिग के साथ दरिंदगी और उसे गर्भवती करने के जुर्म में 20 साल जेल की सजा सुनाई है।
शादी का झांसा देकर दोस्ती और फिर दरिंदगी
अभियोजन पक्ष द्वारा अदालत में पेश की गई जानकारी के अनुसार, दोषी गौरांग गिरीश कंथारिया (23), जो भायंदर पूर्व का निवासी है, ने साल 2021 में पीड़िता से दोस्ती की थी। उसने नाबालिग को शादी का झूठा वादा देकर अपने जाल में फंसाया और उसके साथ बार-बार शारीरिक संबंध बनाए। इस शोषण के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई और उसने अगस्त 2023 में एक बच्चे को जन्म दिया। जनवरी 2022 में पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया था।
कानून की नजर में ‘नाबालिग की सहमति’ का कोई मूल्य नहीं
मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता और आरोपी के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे। हालांकि, विशेष न्यायाधीश रूबी यू मालवंकर ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। ठाणे अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नाबालिग कानूनी अनुबंध करने या शारीरिक संबंध के लिए सहमति देने के योग्य नहीं होता। कानून की दृष्टि में नाबालिग की सहमति को सहमति माना ही नहीं जा सकता।”
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कोर्ट का सख्त फैसला और जुर्माना
अभियोजन पक्ष ने दोषी के खिलाफ तीन महत्वपूर्ण गवाह पेश किए, जिन्होंने आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित कर दिया। हालांकि आरोपी ने अपनी कम उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर कोर्ट से रहम की गुहार लगाई थी, लेकिन न्यायाधीश ने अपराध की गंभीरता और पीड़िता की उम्र को देखते हुए कोई नरमी नहीं बरती।
अदालत ने गौरांग को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(n) और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) की संबंधित धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही, दोषी पर जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे पीड़िता को मुआवजे के तौर पर दिया जाएगा।
