Thane: निर्विरोध चुनाव पर सवाल, जांच की मांग को लेकर मनसे का कोर्ट रुख
Thane Municipal Corporation Election में सत्तारूढ़ दल के 6 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने पर विवाद गहरा गया है। मनसे ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जांच की मांग की है।
- Written By: अपूर्वा नायक
ठाणे महानगरपालिका (सौ. सोशल मीडिया )
Maharashtra Local Body Election: ठाणे महानगरपालिका चुनाव में सत्तारूढ़ दल के छह उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
इस फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने हाई कोर्ट का रुख किया है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं।
मनसे की ओर से राज्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। पार्टी ने आग्रह किया है कि जांच रिपोर्ट आने तक निर्विरोध निर्वाचन के फैसले को स्थगित रखा जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नामांकन और नाम वापस लेने की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई 1957 की कटिंग
इस बीच सोशल मीडिया पर ठाणे से प्रकाशित एक पुराने अखबार की कटिंग तेजी से वायरल हो रही है। यह कटिंग इस बात की पुष्टि करती है कि 68 साल पहले, यानी वर्ष 1957 में हुए ठाणे नगर पालिका चुनाव में भी छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए थे।
1957 के चुनाव का ऐतिहासिक संदर्भ
अखबारी कटिंग के अनुसार, 1957 के ठाणे नगर पालिका चुनाव में जी. एम. कोली, वाई. डी. उर्फ नानासाहेब सुले, के. के. पावसकर, ताराबाई वैद्य, आशा दत्तात्रेय वाघोलिकर और बी. जी. ओक (वकील) निर्विरोध चुने गए थे।
संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से जुड़ा चुनाव
वर्ष 1957 का समय संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के चरम का दौर था। उस चुनाव में निर्विरोध निर्वाचित सभी उम्मीदवार संयुक्त महाराष्ट्र समिति से जुड़े हुए थे। उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर अब मौजूदा चुनावी विवाद की तुलना की जा रही है।
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राजनीतिक बहस और तेज
वर्तमान विवाद और पुराने चुनावी इतिहास के सामने आने के बाद ठाणे की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर विपक्ष चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर वायरल हो रही ऐतिहासिक कटिंग ने बहस को नया मोड़ दे दिया है। आने वाले दिनों में हाई कोर्ट और चुनाव आयोग के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
