‘जानलेवा केक’, जन्मदिन पर बच्चा निगल गया मेटल की पिन, मां ने सुनाई खौफनाक आपबीती
Thane Baker Metal Pin Cake Case: ठाणे में 3 साल का बच्चा केक में छिपी लोहे की 2 पिन निगल गया। 48 घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे के गले से डाक्टरों ने निकाली पिन, मां की चेतावनी।
- Written By: अनिल सिंह
Thane Shocking Metal Pin Cake Incident: ठाणे के पॉश इलाके हीरानंदानी एस्टेट में रहने वाली स्नेहा शेलार ने बीती 31 मई को अपने छोटे बेटे रेयांश के तीसरे जन्मदिन की पूर्व संध्या पर एक शानदार पार्टी का आयोजन किया था। बच्चे की पसंद को ध्यान में रखते हुए एक कस्टमाइज्ड चॉकलेट बॉलिंग एली केक ऑर्डर किया गया था। पार्टी बहुत अच्छी रही और सभी ने केक का लुत्फ उठाया, लेकिन असली मुसीबत अगले दिन शुरू हुई।
घर के बड़े बच्चों को अचानक केक की बची हुई सजावट सामग्री के भीतर लोहे की नुकीली पिनें और बारीक तार दिखाई दीं। बच्चों द्वारा माता-पिता को सूचित करते ही पूरे घर में कोहराम मच गया, क्योंकि रेयांश पहले ही उस हिस्से की चॉकलेट खा चुका था। घबराया हुआ परिवार आनन-फानन में मासूम रेयांश को अगली सुबह नजदीकी डायग्नोस्टिक सेंटर लेकर भागा।
एक्स-रे स्कैन देखकर उड़े होश, आंत में फंसी थीं दो मेटल पिन
अस्पताल में जब डॉक्टर ने रेयांश का एक्स-रे और पेट का स्कैन किया, तो जो रिपोर्ट सामने आई उसने पूरी फैमिली के होश उड़ा दिए। मेडिकल स्कैन की तस्वीरों में साफ नजर आ रहा था कि मासूम बच्चे की छोटी आंत के भीतर दो पैनी मेटल की पिनें फंसी हुई थीं। पीड़ित मां स्नेहा के अनुसार, ठाणे की संबंधित नामचीन बेकरी ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या सूचना के, चॉकलेट बॉलिंग पिन को सीधा खड़ा रखने के लिए उसके अंदर लोहे की बारीक कड़क तारें डाल दी थीं। बेकरी वालों को पहले ही साफ निर्देश दिए गए थे कि यह केक छोटे बच्चों की पार्टी के लिए बनाया जा रहा है, फिर भी ऐसी लापरवाही बरती गई।
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जुपिटर हॉस्पिटल के डॉक्टरों की निगरानी में प्राकृतिक रूप से बाहर आई आफत
इसके बाद बच्चे को तुरंत ठाणे के विख्यात जुपिटर हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां बाल रोग विशेषज्ञों की एक टीम ने उसकी स्थिति का गहन मुआयना किया। डॉक्टरों ने स्थिति को भांपते हुए तुरंत कोई भी बड़ी मेजर सर्जरी न करने की महत्वपूर्ण सलाह दी, क्योंकि वे नुकीले तार पहले ही पेट को पार कर आंतों के काफी आगे तक का सफर तय कर चुके थे। डॉक्टरों ने माता-पिता को हौसला देते हुए दवाओं की मदद से इन पिनों के प्राकृतिक रूप से मल के जरिए बाहर निकलने का इंतजार करने को कहा। पूरे 48 घंटों की जानलेवा दहशत और निगरानी के बाद, दोनों तार बच्चे के शरीर को बिना आंतरिक नुकसान पहुंचाए प्राकृतिक रूप से बाहर आ गए, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे पूर्णतः सुरक्षित घोषित किया।
कानूनी पचड़ों में फंसा परिवार, कंज्यूमर कोर्ट जाने की मिली सलाह
मासूम की जान सुरक्षित होने के बाद पीड़ित परिवार इस गंभीर आपराधिक कृत्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कसरवडावली पुलिस स्टेशन पहुंचा। हालांकि, ठाणे पुलिस ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का बताते हुए परिवार को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के पास भेज दिया। विडंबना यह रही कि एफडीए के अधिकारियों ने भी अब बिना केक या दूषित चॉकलेट सैंपल के किसी भी प्रकार की आधिकारिक जांच शुरू करने से साफ हाथ खड़े कर दिए हैं। इस लचर व्यवस्था के बीच महाराष्ट्र ग्राहक परिषद के अध्यक्ष शिरीष देशपांडे ने परिवार का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के कड़े प्रावधानों के तहत मैन्युफैक्चरर और सेलर पूरी तरह दोषी हैं। उन्होंने पीड़ित मां को बेकरी के खिलाफ मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए सीधे कंज्यूमर कोर्ट में बड़ा मुकदमा करने की सलाह दी है।
