ठाणे-बोरीवली ट्वीन टनल प्रोजेक्ट पर विवाद, मिट्टी ढुलाई से बढ़ा प्रदूषण
Thane-Borivali ट्वीन टनल प्रोजेक्ट के तहत खुदाई से निकलने वाली मिट्टी की ढुलाई को लेकर मुल्ला बाग इलाके में विरोध तेज हो गया है। स्थानीय लोग प्रदूषण रोकने के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर की मांग कर रहे हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
ठाणे बोरीवली ट्विन टनल प्रोजेक्ट (सौ. सोशल मीडिया )
Thane Borivali Twin Tunnel Pollution: ठाणे से बोरीवली की दूरी महज 20 मिनट में पूरा करने को लेकर मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने 11.8 किमी लंबी ठाणे-बोरीवली ट्वीन टनेल मार्ग के निर्माण की परियोजना शुरू की है।
इसके तहत संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से टनेल बनाया जा रहा है। राज्य के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का ड्रीम प्रोजेक्ट कहे जाने वाले इस प्रोजेक्ट की वजह से मुल्ला बाग़ इलाके के नील कंठ ग्रीन, नीलकंठ वु, वेराटन, कास मॉस लाउंज, सत्यशंकर सहित इलाके की अन्य सोसायटियों में रहने वालों को प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।
ठाणे-बोरीवली ट्वीन टनेल प्रोजेक्ट अफेक्टेड पीपुल्स एसोसिएशन ने मिट्टी ढुलाई के लिए डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रमुख राकेश मोदी ने कहा है कि 90 प्रतिशत स्थानीय निवासी डेडिकेटेड कॉरिडोर से सहमत हैं।
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मिट्टी ढुलाई को लेकर ठेकेदार से बढ़ा टकराव
- ठाणे-बोरीवली टनेल की खुदाई के दौरान मिट्टी की ढुलाई को लेकर स्थानीय नागरिकों और ठेकेदार के बीच टकराव देखने को मिल रहे हैं।
- एमएमआरडीए ने मिट्टी के डिस्पोजल को लेकर कन्वेयर बेल्ट का प्रस्ताव दिया था। लेकिन अभी तक इस पर काम आगे नहीं बढ़ पाया है।
- एमएमआरडीए की तरफ से महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का काम ठाणे शहर के मुल्ला बाग इलाके में चल रहा है।
- लगभग 18 हजार 838 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के कारण जहां पेड़ों की कटाई हुई है, वहीं अब मिट्टी की खुदाई शुरू है। जिससे इलाके में धूल भरा वातावरण है। जिसकी वजह से परियोजना का विरोध किया जा रहा है।
हर दिन लगभग 350 डंपर मिट्टी की ढुलाई
मंगलवार को मुल्ला बाग इलाके में ठाणे-बोरीवली ट्वीन टनेल प्रोजेक्ट अफेक्टेड पीपुल्स एसोसिएशन की तरफ से पत्रकार परिषद् आयोजित कर भूमिका स्पष्ट की गयी। एसोसिएशन के कर्ताधर्ता व सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मोदी ने कहा कि टनेल की खुदाई के दौरान हर दिन लगभग 350 डंपर मिट्टी की ढुलाई की जाएगी। स्थानीय लोगों को डर है कि इससे इलाके में एयर पॉल्यूशन बढ़ेगा। एयर क्वालिटी इंडेक्स 250 तक जाता है।
कई लोग हुए बीमार
इससे प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है और कई लोग बीमार पड़ रहे हैं। वेराटन, नीलकंठ ग्रीन्स, सत्य शंकर जैसे डेवलपर्स एक कन्वेयर बेल्ट चाहते हैं। लेकिन 90 प्रतिशत निवासी डेडिकेटेड कॉरिडोर पर सहमत हैं।
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मिट्टी के डंपर डेडिकेटेड कॉरिडोर में जगह से गुजरेंगे, इसलिए निवासियों का कहना है कि ट्रैफिक की कोई समस्या नहीं होगी। राकेश मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सांसद नरेश म्हस्के जल्द ही इस बारे में एक बैठक करेंगे।
