

Thane 2800 Crore TDR Controversy News: संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र अंतर्गत चितलसर-मानपाड़ा में 193 एकड़ जमीन के बदले करीब 2,800 करोड़ रुपये के ट्रांसफर ऑफ डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) देने की प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के स्वप्निल महिंद्रकर ने दावा किया है कि ठाणे मनपा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए एफिडेविट से संबंधित कंपनी के टीडीआर ट्रांजैक्शन का पर्दाफाश हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस मामले में वन विभाग को अंधेरे में रखकर यह ट्रांजैक्शन किया गया था।
सामाजिक संस्था कॉन्शस सिटीजन फोरम की तरफ से इस मामले में एक जनहित याचिका दाखिल करने की तैयारी शुरू हो गयी है। आरोप लगाया गया है कि फैसला लेने की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वन विभाग की भूमिका को नजरअंदाज किया गया है।
गौरतलब हो कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के चितलसर-मानपाड़ा इलाके में करीब 193 एकड़ जमीन पर मेसर्स डी। डायाभाई एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने मालिकाना अधिकार का दावा किया था।
जबकि राज्य सरकार कह रही थी कि यह जमीन वन क्षेत्र है। इस जमीन पर पिछले 50 साल से भी अधिक समय से कानूनी विवाद चल रहा था। ठाणे मनपा ने 193 एकड़ जमीन बायोडायवर्सिटी पार्क (जैवविविधता उद्यान) के तौर पर आरक्षित की है।
आरक्षण की वजह से जमीन का उपयोग विकास कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता था, इसलिए कंपनी ने बदले में डेवलपमेंट ट्रांसफर राइट्स (टीडीआर) मांगा। इस टीडीआर की संभावित कीमत करीब 2,800 करोड़ रुपये है।
मनसे पदाधिकारी स्वप्निल महिंद्रकर के मुताबिक, ठाणे महानगरपालिका ने 25 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में जो एफिडेविट फाइल किया था, उसमें कहा गया है कि उसे डी। डायाभाई एंड कंपनी से करीब 4,04,721.02 स्क्वेयर मीटर या करीब 98 एकड़ जमीन का पजेशन मिल गया है।
यह भी कहा गया है कि संबंधित कंपनी को बड़ी मात्रा में ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) दिए गए हैं और टीडीआर का सिर्फ 0.15 हिस्सा प्रलंबित है। महिंद्रकर ने आरोप लगाया कि असल में, मनपा के पास ग्रुप नंबर 59/A/1/1 में जमीन का पूरा पजेशन नहीं है। संबंधित जमीन पर सिर्फ़ बांस लगाया गया है और इलाका पहाड़ी है।