कल्याण के दुर्गाडी किले पर बकरीद पर भारी तनाव; नमाज के बाद नारेबाजी, जवाब में हिंदुओं का हनुमान चालीसा पाठ
Durgadi Fort Kalyan Tension Eid 2026: कल्याण के दुर्गाडी किले पर बकरीद के दौरान मंदिर बंदी को लेकर तनाव। आनंद दिघे की घंटानाद परंपरा के तहत हुआ हनुमान चालीसा का पाठ।
- Written By: अनिल सिंह
दुर्गाडी किला विवाद में आमने-सामने आए दो समुदाय (फोटो क्रेडिट-X)
Durgadi Fort Kalyan: मुंबई से सटे कल्याण का ऐतिहासिक दुर्गाडी किला पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से धार्मिक और राजनीतिक खींचतान का केंद्र रहा है। इस किले के भीतर एक प्राचीन मंदिर और एक मस्जिद दोनों स्थित हैं। प्रशासन द्वारा हर साल बकरीद के त्योहार पर शांति बनाए रखने के उद्देश्य से हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश करने पर अस्थाई प्रतिबंध लगा दिया जाता है, जिसका हिंदू समुदाय लगातार कड़ा विरोध करता आ रहा है।
इस वर्ष भी ईद के मौके पर जैसे ही प्रतिबंध लागू हुआ, भाजपा (BJP), शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और विभिन्न दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी संगठनों ने प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए पहले से घोषित प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने के लिए कल्याण के लाल चौकी क्षेत्र और दुर्गाडी के आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और दंगा नियंत्रण पुलिस को तैनात किया गया है।
#WATCH | Kalyan, Maharashtra | Security heightened at Durgadi Fort on Eid al-Adha as prayers are offered at the Idgah inside the fort complex. During this time, the administration temporarily stops Hindu devotees from entering the fort’s Durgadevi Temple. Protesting against this,… pic.twitter.com/Nu0qxADfzn — ANI (@ANI) May 28, 2026
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आनंद दिघे का ‘घंटानाद आंदोलन’ और दुर्गाडी किले का इतिहास
दुर्गाडी किले के इस विवाद का सीधा संबंध एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु माने जाने वाले दिवंगत शिवसेना नेता आनंद दिघे से है। साल 1986 में आनंद दिघे ने इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई थी कि मुस्लिम त्योहारों के समय हिंदुओं को उनके अपने ही आराध्य के दर्शन से क्यों रोका जाता है? उन्होंने दावा किया था कि यह मूल रूप से हिंदुओं का पवित्र स्थान है और यहां आने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता। इसी विरोध के तहत उन्होंने किले में ‘घंटानाद आंदोलन’ की शुरुआत की थी, जिसे शिवसेना आज भी हर साल एक रस्म और आंदोलन के रूप में निभाती आ रही है।
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हनुमान चालीसा बनाम नारेबाजी से गूंजा परिसर, पुलिस अलर्ट पर
आज सुबह जैसे ही किले के भीतर ईद-उल-अजहा की सामूहिक नमाज संपन्न हुई, वहां मौजूद कुछ गुटों द्वारा नारेबाजी शुरू कर दी गई। इसके जवाब में किले के बाहर बैरिकेड्स पर रोके गए हिंदू श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं जमीन पर बैठकर ऊंचे स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया। दोनों पक्षों के बीच सीधे टकराव की आशंका को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का प्रयास किया। एहतियात के तौर पर पूरे कल्याण शहर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया गया है।
कानूनी लड़ाई जारी, राजनीतिक दलों ने साधा निशाना
दुर्गाडी किले के इस मालिकाना हक और पूजा के अधिकारों को लेकर दोनों ही समुदायों की ओर से देश की अदालतों में कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनकी कानूनी सुनवाई अभी भी जारी है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया लंबित होने के बावजूद हर साल बकरीद और त्योहारों के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं, जिससे प्रशासन की चुनौतियां और अधिक बढ़ गई हैं।
