workers union (सोर्सः सोशल मीडिया)
Thane Shramik Janata Sangh: मजदूरों और श्रमिकों के अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सड़कों पर संघर्ष करने वाला श्रमिक जनता संघ 60 वर्ष का हो गया है। इस यूनियन की स्थापना स्वतंत्रता सेनानी वसंतराव खानोलकर ने वर्ष 1966 में की थी।
श्रमिक जनता संघ का डायमंड जुबली वार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन ठाणे में आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को पुनः निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता जगदीश खैरालिया को महासचिव नियुक्त किया गया। हीरक जयंती समारोह के दौरान 1975 से मजदूरों के अधिकारों के लिए कार्य कर रहे वरिष्ठ श्रम कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता रवींद्र नायर को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में बोलते हुए अधिवक्ता रवींद्र नायर ने कहा कि मजदूरों को केवल अदालतों की लड़ाई से न्याय नहीं मिल सकता, बल्कि संगठित शक्ति और सड़क पर संघर्ष भी उतना ही जरूरी है। मेधा पाटकर ने कहा कि ऐसे समय में, जब मजदूरों की लड़ाई सड़कों पर जारी है, रवींद्र नायर जैसे समर्पित व्यक्तित्व को सम्मानित करना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यकर्ताओं को अपनी विचारधारा और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक अधिकार किसी भी अन्य कानूनी अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण हैं और मानवाधिकार सर्वोपरि हैं।
मेधा पाटकर ने सवाल उठाया कि प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए कानून होने के बावजूद सरकार सक्रिय रूप से हस्तक्षेप क्यों नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार का सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग भी न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 को प्रभावी रूप से लागू नहीं कर रहा है। ठाणे मानसिक अस्पताल के सफाई कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन पाने के लिए पिछले छह वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं हो सकता।”उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे मजदूरों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है।
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अधिवेशन में मेधा पाटकर को अध्यक्ष, डॉ. संजय मंगला गोपाल और पर्वत सोनेर को उपाध्यक्ष, जगदीश खैरालिया को महासचिव, सुनील कंड, सुनील दिवेकर और संजय चौहान को सचिव, अविनाश नाइक को कोषाध्यक्ष तथा सुदर्शन साहू को सह-कोषाध्यक्ष चुना गया। इस दौरान मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों-मुंबई, ठाणे, कल्याण, भुसावल और नंदुरबार सहित केंद्रीय रेलवे से जुड़े यूनियनों के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय जनरल काउंसिल और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्यों का भी चयन किया।