भिवंडी में मोबाइल टावर दे रहे खतरों को दावत
- Written By: प्रभाकर दुबे
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भिवंडी: भिवंडी महानगरपालिका (Bhiwandi Municipal Corporation) क्षेत्र अंतर्गत तमाम इमारतों पर लगे हुए मोबाइल टावर (Mobile Tower) खतरों को दावत दे रहे हैं। विगत माह वल पाड़ा स्थित वर्धमान कंपाउंड में हुई इमारत जमींदोज हादसे में उक्त इमारत के ऊपर लगा हुआ मोबाइल टावर भी इमारत हादसे का कारण माना गया था। दपोड़ा वल पाड़ा इमारत हादसे के बाद महानगरपालिका कमिश्नर विजय कुमार म्हसाल (Commissioner Vijay Kumar Mhasal) ने इमारतों पर लगे हुए टावरों को सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार देते हुए जर्जर इमारतों पर लगे हुए मोबाइल टावरों को हटाए जाने का निर्देश संबंधित प्रभाग अधिकारियों को दिया है। महानगरपालिका प्रभाग अधिकारियों द्वारा इमारत के मालिकों, सोसाइटी संचालकों को टावर हटाए जाने के निर्देश दिए जाने के मोबाइल कंपनियों में हड़कंप मचा हुआ है।
गौरतलब है कि भिवंडी महानगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत स्थित इमारतों पर विभिन्न कंपनियों के कुल 277 मोबाइल टावर लगाए गए हैं। 277 मोबाइल टावरों में से 17 मोबाइल टावर ही बीएसएनल द्वारा मंजूरी लेकर लगाए गए हैं। मोबाइल टावरों में से बीएसएनएल 17, एटीसी 68, जेटीएल 4, इंडस 68,रिलायंस कंपनी 27, जियो 97, एयरटेल 1 सहित कुल 277 मोबाइल टावरो का समावेश है। भिवंडी शहर में 260 मोबाइल टावर महानगरपालिका प्रशासन से बगैर मंजूरी लिए हुए इमारत मालिकों, सोसाइटी धारकों ने अपने आर्थिक फायदे के लिए लगाए हैं।
इमारत मालिकों, सोसाइटी संचालकों को मिल रहा इतना किराया
सच्चाई यह है कि इमारत मालिकों, सोसाइटी संचालकों को मोबाइल टावर कंपनियों की तरफ से प्रतिमाह 20 से 25 हजार रुपए किराया मिलता है जिसके लालच में शहर स्थित इमारतों पर महानगरपालिका से बगैर कोई मंजूरी लिए ही मोबाइल टावरों का जाल शहर में बिछा हुआ है। शहर स्थित कई धोखादायक, जर्जर इमारतों पर लगे हुए मोबाइल टावर जीवन सुरक्षा को गंभीर चुनौती देते दिखाई पड़ रहे हैं।
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टैक्स भुगतान की नोटिस पर जाती हैं कंपनियां कोर्ट
आश्चर्यजनक है कि महानगरपालिका से बगैर मंजूरी लिए इमारतों पर अवैध रूप से मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनियों से महानगरपालिका टैक्स वसूल करती है। मोबाइल कंपनियों पर महानगरपालिका का करीब 35 करोड़ रुपए से अधिक राशि बकाया है। महानगरपालिका द्वारा टैक्स अदायगी के लिए कड़ाई किए जाने पर विगत दिनों कई मोबाइल कंपनियां जरूरी सेवा का हवाला देकर कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। महानगरपालिका उपायुक्त दीपक झिंझाड़ ने अफसोस प्रकट करते हुए कहा कि मोबाइल कंपनियों पर एक्शन लिया जाता है, लेकिन मोबाइल कंपनियों अति आवश्यक सेवाओं का हवाला देकर कोर्ट से स्थगन आदेश लाकर महानगरपालिका की कार्रवाई को ठेंगा दिखाती हैं। मोबाइल कंपनियां महानगरपालिका का टैक्स भुगतान भी आसानी से नहीं करती, बावजूद ग्राहकों से सेवा के बदले तगड़ी वसूली करती हैं।
भ्रष्टाचार की बदौलत बढ़ रहे अवैध मोबाइल टावर
शहर के नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका अधिकारियों के भ्रष्टाचार की बदौलत ही समूचा शहर मोबाइल टावर के मकड़जाल में फंसा हुआ है। भ्रष्ट महानगरपालिका अधिकारी इमारत मालिकों से जेबें भरते हैं और नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए आंखे बंद कर लेते है। नागरिकों द्वारा भ्रष्ट महानगरपालिका अधिकारियों की शिकायत प्रकाश में आने पर भी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी अपना हिस्सा लेकर चुप्पी साध लेते हैं।
इमारतों पर नियमों के तहत होगी कार्रवाई
उक्त संदर्भ में महानगरपालिका कमिश्नर विजयकुमार म्हसाल का कहना है कि महानगरपालिका से बगैर मंजूरी मोबाइल टावर लगाना नियमों के खिलाफ है। जर्जर इमारतों पर लगे हुए मोबाइल टावर जीवन सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। अधिकारियों को जर्जर इमारतों से मोबाइल टावर हटाने के निर्देश दिए हैं। हादसों को रोकने के लिए महानगरपालिका प्रशासन कोई कोताही नहीं करेगी। इमारत, सोसाइटी संचालकों पर भी नियमों के तहत कार्रवाई होगी।
